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मनोवैज्ञानिकों की सफल काउंसिलिंग, डिप्रेशन से बाहर आए मरीज

स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रुम से कोरोना संक्रमण के प्रकरण व क्वारंटाइन लोगों को मिल रहा फायदा

मनोवैज्ञानिकों की सफल काउंसिलिंग, डिप्रेशन से बाहर आए मरीज
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भोपाल, यदि आपके घर कोई डिप्रेशन का मरीज है, तो इस समय उन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि मौजूदा परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीें हैं। लॉक डाउन और कोरोना कोविड 19 की नेगेटिव खबरों का सीधा असर इन पर पड़ रहा है। ऐसे में इन्हे ज्यादा देखभाल और काउंसिलिंग की भी जरूरत है। भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कोरोना कोविड 19 कंट्रोल रूम से मनोवैज्ञानिक लगातार ऐसे लोगों की काउंसिलिंग कर रहे हैं। काउंसिलिंग में सामने आया है कि डिप्रेशन के शिकार लोग मौजूदा परिस्थितियों के कारण गुमसुम हो गए। जिन्हें सिर्फ फोन पर काउंसिलिंग दी गई। मनोवैज्ञानिकों की लगातार काउंसिलिंग होने से जो तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर यही कहा जा सकता है कि काउंसिलिंग से लोग सामान्य अवस्था में आने लगे हैं।

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक

स्मार्ट सिटी कंपनी के लिए नि:शुल्क काउंसिलिंग कर रहीं मनोवैज्ञानिक डॉ. कला मोहन और मनोवैज्ञानिक डॉ सोनम छटवानी ने बताया कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से जो नेगेटिविटी आ रही है, उससे लोगों में डर बैठ गया है। नेगेटिविटी निकाल देंगे तो डर भी भाग जाएगा। यह समय डर का नहीं सेफ्टी का है। जिन लोगों ने डर को निकाल दिया है, वे लॉकडाउन के दौरान घर अपनी क्रिएटिविटी और स्किल के हुनर दिखा रहे हैं। कोई मास्क बना रहा है तो कोई कुछ अन्य काम कर रहा है। वक्त सभी परिस्थितियों में पॉजिटिव रहने का है।

ये रहा डिप्रेशन का कारण :

स्मार्ट सिटी के कोरोना कोविड 19 कंट्रोल रूम से क्वारंटाइन हुए लोगों और पॉजिटिव लोगों की काउंसिलिंग कराई गई। इसमें ज्यादातर लोगों ने बताया कि कोरोना संक्रमण की जानकारी मिलते ही लोगों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया। पीडि़तों से लोग फोन या सोशल मीडिया पर भी चर्चा करने से परहेज कर रहे है। इसका मानसिक असर क्वारंटाइन व पॉजिटिव मरीजों पर पड़ता है। इस बात की भड़ास भी काउंसिलिंग के दौरान मरीजों व क्वारंटाइन हुए लोगों ने काउंस्लरों पर निकाली। जो लोगों का डिप्रेशन में जाने का कारण भी यही है, लेकिन काउंसिलिंग के बाद सब ठीक हो गया।

इन्होंने बताया

भोपाल स्मार्ट सिटी के कोरोना कंट्रोल रूम में मनोवैज्ञानिकों की सेवाएं ली जा रही है। मनोवैज्ञानिक क्वारंटाइन हुए लोगों से सम्पर्क कर उन्हें काउंसिलिंग देते हैं। इस प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जा रही है। इसका लाभ नागरिकों का मिल रहा है। -

दीपक सिंह, सीईओ

भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन

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