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कोरोनाकाल में मरने वालों के परिजन का दर्द, मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे लोग

कोरोनाकाल में मरने वालों के परिजन का दर्द, मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे लोग
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भोपाल. कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए शासन ने अधिकांश काम ऑनलाइन कर दिए हैं। इससे जहां कई सुविधाएं घर बैठे मिलने लगीं हैं, वहीं अब लॉकडाउन में मरने वालों के परिजन के लिए यह एक परेशानी का कारण बन गया है। जिन्होंने अपने को खोया है, उनका दर्द तो बांटने के लिए लोग भी शामिल नहीं हो सके। उन्हें अकेले ही यह दर्द सहना पड़ा।

परिवार को संभाला और खुद को भी सांत्वाना दी। अब भी अपनों को खोने और उसके बाद पूरी रस्मों से उनका अंतिम संस्कार नहीं कर पाने का दर्द हर पल है। उनके इस दर्द को अब यही ऑनलाइन सिस्टम हर रोज कुरेद रहा है। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अंतिम संस्कार होने के 21 दिन के अंदर आवेदन करना होता है। उससे ज्यादा समय होने पर दूसरे विभाग से परमिशन लेने पड़ती है। ऐसे में किसी की पेंशन नहीं बन पा रही है, तो कोई गाड़ी ट्रांसफर के लिए आवेदन नहीं कर पा रहा है। ऐसे ही लाेगों ने दैनिक भास्कर से अपनी पीड़ा बयां की।

भोपाल लोकल वॉर्ड कार्यालय बंद होने के कारण लोग हमीदिया अस्पताल के पास स्थित नगर निगम के ऑफिस आते हैं। यहां पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन फॉर्म जमा करने के लिए कह दिया जाता है।

कहानी-एक.

मां की पेंशन शुरू नहीं हो पा रही

बैरागढ़ निवासी प्रकाश के पिता की मौत लॉकडाउन में 25 मार्च को हुई थी। उसमें ज्यादा लोग शामिल नहीं हो पाए। न ही वह किसी से पिता के जाने का सूनापन बांट पाए। लॉकडाउन के दौरान वार्ड कार्यालय बंद था। खुला तो नगर निगम ने ऑनलाइन फॉर्म ही मान्य करने की शर्त रख दी। प्रकाश ने बताया- सिस्टम ने फॉर्म को एक्सिस ही नहीं किया। नियमानुसार अंतिम संस्कार करने के 21 दिन के अंदर प्रमाण पत्र बनवाना होता है। अब बताया जा रहा है कि दूसरे विभाग से अनुमति लेनी पड़ेगी। वहां गया तो उन्होंने फॉर्म लेकर आने को कहा। फॉर्म देने पर बोले- 10 जून को आना। फिर बताया अभी फाइल पर साइन नहीं हुए हैं। बाद में आना। बुधवार को बोले- 20 जून को आना। मां की पेंशन शुरू करवानी है। गाड़ी से लेकर कई जगह पापा का ही नाम है। उन सब में सुधार करवाना है, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि सिस्टम ही अब मदद नहीं कर रहा।

कहानी- 2.

मां को खोया, अब दफ्तारों के चक्कर काट रहा हूं

बैरागढ़ के रहने वाले पप्पू ने बताया कि 19 मई को मां हमें छोड़कर चली गईं। लॉकडाउन के कारण अंतिम संस्कार के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनवा पाया। लोकल ऑफिस बंद था। लोगों से पूछकर हमीदिया अस्पताल के पास दफ्तर पहुंचे, तो वहां लोगों की लाइन लगी थी। कहा- सामने कैफे से ऑनलाइन भरो। फॉर्म 21 दिन से ज्यादा होने के कारण नहीं भरा गया। अब अनुमति (अनुज्ञा) के लिए यहां-वहां के चक्कर लगा रहा हूं।

कहानी- 3.

बेटे को खोया, अब मृत्यु प्रमाण के लिए भटकना पड़ रहा

फुटवेयर व्यापारी अनिल ने बताया कि 16 साल के बेटे की मौत मस्कुलर डिसऑर्डर के कारण दो महीने पहले हो गई थी। हमें उसकी मौत के बारे में पहले से पता था। वह 16 साल और दो महीने की जिंदगी ही जी पाया। अब उसके मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानी आ रही है। नियमानुसार 21 दिन के अंदर होने पर ही सिस्टम उसे लेता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण सब बंद होने के कारण हम उसे उस समय नहीं बनवा पाए। शासन को लॉकडाउन को लेकर इसमें छूट देना चाहिए। इससे लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा।

कहानी- 4.

ऑनलाइन फॉर्म ही नहीं भर पा रहा

निजामुद्दीन कॉलोनी के पास अब्बास नगर निवासी नसीम खान ने बताया कि मां की मौत लॉकडाउन में हुई थी। 21 दिन से अधिक होने के कारण ऑनलाइन फॉर्म भरने गया, लेकिन ऑनलाइन समझ में ही नहीं आ रहा है। कई लोगों की मदद ली, लेकिन कोई भी फॉर्म भर नहीं पाया। अब मैं फॉर्म जमा करने के लिए चक्कर काट रहा हूं।

शहर के प्रमुख विश्रामघाट

विश्राम घाट 1 अप्रैल से 31 मई तक कुल अंतिम संस्कार

सुभाष नगर 431

छोला मंदिर 275

भदभदा 318

संत नगर (बैरागढ़) 110

कोलार 80

इसलिए जरूरी

पुलिस और कोर्ट केस में

प्राॅपर्टी, पेंशन और गाड़ी के कागजातों में नाम बदलवाने के लिए

बैंक खातों के लिए

राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आई कार्ड से नाम कटवाने के लिए

हम जल्द ही वार्ड कार्यालय में फॉर्म लेने की व्यवस्था कर देंगे

कमिश्नर नगर निगम वीएस चौधरी कोलसानी ने बताया कि अभी ऑनलाइन फॉर्म जमा हो रहे हैं। लोगों की समस्या को देखते हुए अधिकारियों और विभागों से चर्चा की है। हम सोमवार से इसे लोकेल वॉर्ड कार्यालय में ही आवेदन जाम करने की सुविधा शुरू कर देंगे। इसके साथ ही अन्य बातों पर भी विभाग के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं।

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