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योग निरोगी काया बनाने के साथ ही विषम परिस्थितियों में मानसिक संतुलन में मददगार शहर की प्रख्यात योग प्रशिक्षक अकांक्षा शर्मा ने साझा किए अनुभव

योग निरोगी काया बनाने के साथ ही विषम परिस्थितियों में मानसिक संतुलन में मददगार  शहर की प्रख्यात योग प्रशिक्षक अकांक्षा शर्मा ने साझा किए अनुभव
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भोपाल. ॐ सर्वे भवन्तु सुखिन : सर्वे सन्तु‍ निरामया : ।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:खभाग्भवेत्।

भवार्थ -"सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें,

सभी का जीवन मंगलमय हो,

किसी को कोई दु:ख न हो।"

आप सभी को 6 वें अंर्तराष्ट्रीय

योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।

योग के प्रणेता महर्षि पंतजलि कहते है -

" अथयोगानुशासनम् "

अर्थात जीवन में अनुशासन ही योग है। योग एक जीवन पद्धति है, जीवन दर्शन है यह जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला है।

योग शब्द का अर्थ एक्य या एकत्व होता है जिसका अर्थ है जोड़ना । योग के ग्रंथों के अनुसार आत्मा का परमात्मा से मिलन योग है।

योग हमारी भारतीय प्राचीन संस्कृति है। ये हमारे ऋषि मुनियों द्वारा बताया गया ज्ञान-विज्ञान से युक्त एक विशेष पद्धति है। इसमें मानव जाति का समस्त उत्थान, उत्कर्ष और विकास समाहित है। मानव मात्र की प्रसुप्त और अजागृत शक्तियों का जागरण कर व्यक्ति के व्यक्तित्व को शिखर तक पहुँचानें की अपूर्व क्षमता योग में विद्यमान है। इसलिये इसे योग साधन भी कहते है।

योग हमारे व्यक्तित्व के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और भावात्मक सभी पहलुओं को प्रभावित करता है।

व्यवहारिक स्तर पर योग शरीर, मन और आत्मा में संतुलन और सामंजस्य स्थापित करने का एक सर्वश्रेष्ठ साधन है।

पटकर्म, आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बंध और ध्यान के माध्यम से यह संतुलन पाया जा सकता है।

भौतिकता और वैज्ञानिकता की दृष्टि से आज का मानव अत्यंत समृद्ध है। किन्तु आध्यात्मिक दृष्टि और शारीरिक स्वास्थ्य के कारण उसका विकास अवरूद्ध हो रहा है। अगर स्वास्थ्य की दृष्टि से देखे तो कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक विकृतियां आक्रमण कर रही है। इन परिस्थितियों में मनुष्य एक ऐसा साधन ढूंढ रहा है जो उसको इन समस्याओं से छुटकारा दिला सके। ऐसी स्थिति में योग एक सटीक माध्यम के रूप में प्रयोग हो रहा है।

जीवन की पहली आवश्यकता है शारीरिक स्वास्थ्य और आरोग्य की प्राप्ति। व्यक्ति जब तक स्वस्थ नहीं होगा, तब तक उसकी उन्नति, प्रगृति संभव नहीं है। अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिय तंदरूस्त शरीर की प्राप्ति का सर्वसमर्थ साधन है योग।

हठयोग में कहा गया है नियमित योगाभ्यास व्यक्ति के शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाता है।

योग के संबंध में स्वयं के अनुभव को साझा करते हुये मैं कहना चाहूँगी कि योग केवल बाहय शरीर को आकर्षक बनाने या वजन नियंत्रण के संबंध में ही नहीं है ये सिर्फ क्रियाओं तक ही सीमित नहीं है, जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव और सभी तरह की परिस्थितियों में शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाये रखना हम योग से ही सीखते है। योग कोई चमत्कारिक शक्ति तो नहीं है, जीवन में आने वाली हर परिस्थिति में संतुलित रहना सिखाता है योग।

चिंता, तनाव, दबाब, अनिद्रा, निराशा ये सभी मानसिक विकृतियां है। जो विषम परिस्थितियों में मनुष्य को नकारात्मकता की और ले जाती है। इन परिस्थितियों में हिम्मत रखते हुय जब हम योग को अपनाते है तो इन समस्याओं का समाधान धीरे-धीरे होने लगता है। योग की इसी सकारात्मकता के कारण आज लोग योग की तरफ रूझान दिखा रहे है।

ऐसी परिस्थितियों का सामना मैंने भी अपने जीवन में किया जब मेरे बांये हाथ पर टयूमर हुआ, एक साथ में दो बार ऑपरेशन हुये। ऑपरेशन के बाद रेडियों थैरेपी के द्वारा उपचार किया गया। ऐसे समय में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर हुआ। इस समय में योग एक मात्र सहारा बना जिससे जीवन में फिर से आगे बढ़ने की हिम्मत मिली और धैर्य के साथ नियमित रूप से योग का अभ्यास करके शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णत: स्वस्थ होकर आज समाज में लोगों को योग से संपूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति को संदेश देते हुये इस क्षेत्र में कार्यरत हूँ।

कोरोना संक्रमण का दौर जो काफी समय से चल रहा है , सरकार द्वारा दी गयी गाइड लाइन का पालन हम सब कर ही रहे है अब तो जैसे ये सब करने की (बार - बार हाथ धोना, बिना मास्क घर से न निकलना और सोशल डिस्टनसिंग का पालन) हमारी आदत ही बन चुकी है।

बहुत अच्छी बात है सिर्फ कोरोना संक्रमण के समय ही नही अपने रोज़मर्रा के जीवन मे हम लोगो का अपने स्वास्थ्य को लेकर इसी तरह जागरूक होना बहुत आवश्यक है। इससे किसी भी तरह के संक्रमण का असर हमारे स्वास्थ्य पर जल्दी नही होगा।

इसके लिए हम सबको अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का प्रयास अपने दैनिक जीवन मे अपने खान - पान और दिनचर्या के साथ करने का प्रयास करना चाहिए।

जैसे - अपने दिन की शरुआत योग से करें, योग शरीर को अंदर और बाहर से मजबूत बनाता है ।अपने खान - पान की आदतों में थोड़ा सा बदलाव लाकर हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते है जैसे - अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी , अदरक, दालचीनी,कालीमिर्च,ग्रीन टी , विटामिन सी युक्त फल एवं सब्ज़ियां, ।

ऐसा करने से हमारा शरीर और मन पूरी तरह से हर विषम परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।

इसी प्रकार बच्चों को योग का महत्व और घर के बने शुद्ध , सात्विक भोजन का महत्व समझाएं। बच्चों के शरीर के संपूर्ण विकास में योग बहुत सहायक है और इससे उनका आत्म विश्वास बढेगा , सूर्य नमस्कार , आसन और ध्यान से मन शांत होगा बच्चे तनाव मुक्त रहेगें, इम्यून सिस्टम को मजबूत करेगा, बीमारियों से बचाव करेगा और आधुनिक जीवनशैली के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं से उनका बचाव करेगा।

इसी प्रकार गर्भवती महलाओं के गर्भकाल के समय आने वाले बदलाव जैसे - हार्मोनल चेंज , स्ट्रेस , एंजायटी, डिप्रेशन आदि सभी समस्याओं का निदान योग से संभव है और गर्भ से ही उनके शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सम्पूर्ण विकास में बहुत सहायक होगा ।

इस प्रकार योग के बारे में जितना बताया जाए कम ही है। हम सब यौगिक जीवनशैली को अपनाकर अपना जीवन बदल सकते हैं।

आवश्यकता है तो इस भागदौड़ भरे जीवन मे से कुछ महत्वपूर्ण क्षम अपने आप के लिए निकालने की।

"क्योंकि आज के समय मे स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है ।"

अपने दिन की शुरूआत ईश्वर के नाम और योग से करें। इससे जीवन में सकारात्मकता आती है। आसन, प्राणायाम, मुद्रा और ध्यान के द्वारा मन को एकाग्र, मानसिक स्थिरता और मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक है। आसन से अपने शरीर पर नियंत्रण प्राप्त होता है और शरीर निरोगी बनता है। प्राणायाम शरीर और मन की साधना है। प्राणायाम से शरीर, मन और इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करके अपनी श्वासों पर नियंत्रण किया जाता है। ध्यान के माध्यम से मन को एकाग्र और शांत किया जाता है। ध्यान शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त करने का एक मात्र अचूक उपाय है। सभी मनोकामिक रोगों के लिये ध्यान एक मात्र उपचारात्मक साधन है।

" योग एक ऐसी अमूल औषधी है जो बिना मूल्य के हमें स्वास्थ्य प्रदान कर सकती है।"

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