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शीत लहर से तापमान में आ रही निरंतर गिरावट, पाले की संभावनाएं बढ़ी

शीत लहर से तापमान में आ रही निरंतर गिरावट, पाले की संभावनाएं बढ़ी
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भोपाल । संयुक्त संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, भोपाल संभाग बीएल. बिलैया ने शीतलहर के कारण तापमान में निरंतर गिरावट आने के कारण पाले की संभावना प्रतीत के दृष्टिगत दलहनी, तिलहनी एवं सब्जी फसलों को पाले एवं शीतलहर से बचाव के लिए किसानों को सलाह दी गई है कि खेत की सिंचाई करें। यदि पाला पडऩे की संभावना हो या मौसम विभाग से पाला पडऩे की चेतावनी दी गई हो तो फसलों की हल्की सिंचाई करें। किसान जिस रात पाला पडऩे की संभावना हो उस रात खेत की उत्तर पश्चिमी दिशा में खेतों के किनारे पर मेड़ों पर रात्रि में कूड़ा -कचरा जलाकर धुंआ करें। फसलों को पाले से बचाने के लए एक कि.ग्रा. गंधक को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर के हिसाब से छिकाव करें।

पौधों को ढंके

पाले से सर्वाधिक नुकसान नर्सरी में होता है। नर्सरी में पौधों को प्लास्टिक की चादर से ढक देना चाहिए, ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2 से 3 डिग्री सेन्टीग्रेड बढ़ जाता है, जिससे तापमान जमाव बिन्दु तक नहीं पहुंच पाता है और पौधा पाले से बच जाता है। प्लास्टिक की जगह पुआल, पैरा का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

ये है दीर्घकालीन उपाय

पाले से फसलों को बचाने के लिए खेत की मेड़ों पर वायु अवरोधक पेड़ जैसे शहतूत, शीशम, बबूल, खेजड़ी आदि लगाना चाहिए, जिससे पाले एवं शीत लहर से फसल का बचाव हो सके। उल्लेखनीय है कि संभाग में रबी वर्ष 2020-21 में दलहनी फसलों का 492.97 एवं तिलहनी फसलों का 16.68 हजार हैक्टेयर का क्षेत्राच्छादन हुआ है।

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