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ब्रांड बनकर सामने आए प्राकृतिक और ऑर्गेनिक गुड़

ब्रांड बनकर सामने आए प्राकृतिक और ऑर्गेनिक गुड़
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भोपालनरसिंहपुर जिले की करेली का गुड़ देश-विदेश में मशहूर है, लेकिन अब यहां का प्राकृतिक और ऑर्गेनिक गुड़ ब्रांड बनकर सामने आया है। राजधानी भोपाल के हाट बाजार में लगे गुड़ा मेला में आए किसानों ने कहा कि हम तो सिर्फ गन्ने की खेती करते थे, थोड़ा बहुत गुड़ बनाते थे, हमें कभी उम्मीद भी नहीं थी कि गुड़ का भी कभी मेला लगेगा। यह कहना है नरसिंहपुर जिले के गुड़ उत्पादक किसानों का। बता दें कि राजधानी भोपाल के हाट बाजार में नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा, गोटेवांग और करेली के गुड़ उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए किसान कल्याण, कृषि विकास विभाग एवं जिला प्रशासन नरसिंहपुर ने गुड़ मेला का आयोजन किया है।

गुड़ मेला को लेकर किसानों और गुड़ उत्पादकों में खासा उत्साह रहा। मेले में नरसिंहपुर जिले के 20 से 25 उत्पादकों ने गुड़ और अरहर दाल के स्टाल लगाए। यहां आए ज्यादातर किसान और उत्पादक गन्ने की खेती करते थे, लेकिन अब स्वयं का गुड़ उत्पादन कर रहे हैं।

गुड़ को बनाया ब्रांड, 35 से 40 प्रोडक्ट बाजार में

गुड़ को ब्रांड बनाने वाले गाडरवारा योगेश कौरव ने बताया कि वह ऑर्गेनिक गुड़ बनाते हैं, जो देश के साथ ही दुबई, यूएस और कनाडा समेत कई देशों में एक्सपोर्ट होता है। योगेश कौरव ने गुड़ से करीब 35 से 40 प्रोडक्ट बाजार में उतारे हैं। इसमें पैक्ड गुड़, जैगरी पॉउडर, विनेगर, कैंडी, चॉकलेट, फ्लेवर्ड गुड़ समेत कई वैरायटी हैं।

गुड़ के कारोबारियों को मिलेगी नई पहचान

नरसिंहपुर जिले के ही ऑर्गेनिक गुड़ के कारोबारी बताते हैं कि वह करीब 30 साल से गुड़ का उत्पाद और कारोबार कर रहे हैं, लेकिन कभी इस तरह के मेले का आयोजन नहीं हुआ। पहली बार इस तरह के आयोजन को देखकर काफी उत्साहित हूं। राजधानी भोपाल में इस तरह का प्लेटफॉर्म मिलना बड़ी बात है। एक ही जगह पर इतने सारे कारोबारी आए और हजारों लोगों ने हम लोगों के गुड़ के बारे जाना।

गौवंश आधारित प्राकृतिक खेती से बना रहे गुड़

गाडरवारा के इंद्रकुमार मालवीय बताते हैं कि वो गौवंश आधारित खेती कर प्राकृतिक गुड़ का उत्पादन करते हैं। इंद्रकुमार के मुताबिक वह गन्ने की खेती के लिए सिर्फ गोबर और गोमूत्र का ही उपयोग करते हैं। किसी भी प्रकार के केमिकलयुक्त खाद या दवा का उपयोग नहीं करते। इससे खेतों की उवर्रक क्षमता भी बनी रहती है साथ ही इन गन्नों से बने गुड़ का स्वाद ही अलग होता है।

एक्सपोर्ट होता है 5 हजार रुपए किलो का आयुर्वेदिक गुड़

गुड़ का भाव यदि पांच हजार रुपए किलो सुना जाए तो शायद यकीन नहीं होगा, लेकिन यह सच है कि गुड़ 5 हजार रुपए किलो भी मिलता है। गाडरवारा के योगेश कौरव बताते हैं कि गुड़ की एक वैरायटी है, जो 5 हजार रुपए किलो के भाव से बनता है। इसे आयुर्वेदिक गुड़ के नाम से बेचते हैं। इस गुड़ को बनाते समय स्वर्णभस्म, अश्वागंधा, तुलसी समेत कई आयुर्वेदिक औषधि मिलाई जाती हैं। आयुर्वेदिक गुड़ को सिर्फ ऑर्डर पर बनाया जाता है, जो ज्यादातर एक्सपोर्ट ही होता है।

मेला खत्म, लेकिन 13 जनवरी तक मिलेगा गुड़

भोपाल हाट में तीन दिवसीय गुड़ मेले का रविवार को समापन हो गया, लेकिन भोपालवासियों की मांग पर किसान और माल मंगाकर 13 जनवरी तक गुड़ बेचेंगे। मेला में किसानों ने करीब 200 क्विंटल से ज्यादा गुड़ और 50 क्विंटल तुअर दाल हाथों हाथ बेच दिया। जैविक उत्पादों की डिमांड देखते हुए किसानों ने अपने उत्पाद फिर बुलाए हैं। गुड़ मेला तो रविवार को खत्म हो गया, लेकिन संक्रांति मेला में ये उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे।

मेला में कई तरह के गुड़

पैक्ड गुड़- 60-150 रुपए किलो

फ्लेवर्ड गुड़-100-150 रुपए किलो

गुड़ कैंडी-150-250 रुपए किलो

गुड़ चॉकलेट-200-250 रुपए किलो

गुड़ विनेगर- 150 रुपए 500 एमएल

जैगरी पॉउडर-100-150 रुपए किलो

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