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विधानसभा मानसून सत्र : 2 लाख करोड़ से अधिक का बजट प्रस्ताव पेश करने की तैयारी,बिना चर्चा पारित होने के आसार

विधानसभा मानसून सत्र :  2 लाख करोड़ से अधिक का बजट प्रस्ताव पेश करने की तैयारी,बिना चर्चा पारित होने के आसार
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स्वदेश ब्यूरो,भोपाल। प्रदेश सरकार आगामी 20 जुलाई से शुुरु होने वाले राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में करीब दो लाख करोड़ रुपए का बजट लाने की तैयारी में है। सत्र की अल्पावधि को देखते हुए बजट अनुदान की सभी मांगे एक साथ पेश कर इन्हें बिना चर्चा पारित कराया जा सकता है। बजट पेश करने को लेकर विभाग ने सभी आवश्यक तैयारियां शुरु कर दी हैं।

गौरतलब है,कि राज्य विधानसभा का मानसून सत्र आगामी 20 से 24 जुलाई तक आहूत किया गया है। इसकी महज 5 बैठकें होंगी। बजट प्रस्ताव पहले दिन ही पेश होने के आसार हैं। पंरपरानुसार,इस पर तीन दिन की सामान्य चर्चा होती रही है,लेकिन सत्र के दौरान सरकार आधा दर्जन से ज्यादा अन्य संशोधन विधेयक भी लाने की तैयारी में है। यह अधिनियम कृषि उपज मंडी, श्रम कानून, नगर पालिक और पंचायतराज अधिनियम में संशोधन से जुड़े होंगे। ऐसे में माना जा रहा है,कि बजट अनुदान की सभी मांगे एक साथ पेश कर इन्हें पारित करा लिया जाए। विपक्ष के कटौती प्रस्ताव पेश करने पर इन पर कुछ घंटों की सामान्य चर्चा हो सकती है।

दो लाख करोड़ से अधिक का होगा बजट

पेश किए जाने वाला बजट दो लाख करोड़ रुपए से अधिक रहने के आसार हैं,हालांकि यह बीते साल की तुलना में करीब 30 हजार करोड़ रुपए कम होगा। दरअसल, कोरोना संकट व प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए बजट का आकार कम करने की कवायद पिछली सरकार में ही शुरु हो गई थी। इस स्थिति में नए प्रस्ताव भी सीमित संख्या में ही शामिल किए जाएंगे। यह बजट विधानसभा के पिछले सत्र में ही पेश किया जाना था,लेकिन कोरोना की वजह से बजट सत्र पूरा नहीं हो पाया था, इसलिए सरकार को एक लाख 66 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेखानुदान अध्यादेश लाना पड़ा था। इसकी अवधि 31 जुलाई तक है। इसके पहले विनियोग और वित्त विधेयक सदन से पारित करवाकर राज्यपाल की अनुमति लेकर अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित करनी होगी। वित्त विभाग ने इसकी तैयारी भी शुरु कर दी है।

केंद्रीय सहायता से आस

बताया जा रहा है कि राज्य के करों में आई कमी की पूर्ति वित्तीय वर्ष की बाकी अवधि में पूरी होने की संभावना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक लॉकडाउन के कारण राज्य सरकार को करीब 26 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो चुका है। पेट्रोल और डीजल पर एक-एक रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर लगाकर कुछ नुकसान की भरपाई की कोशिश की गई है, लेकिन इससे भी सालभर में करीब 570 करोड़ रुपये की आय ही होगी। ऐसे में माना जा रहा है,कि बजट का आकार केंद्रीय सहायता पर निर्भर करेगा। राज्यों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं में सहायता की राशि बढ़ाई है। नई योजनाएं भी शुरू हुई हैं। राज्य सरकार की कोशिश भी है कि अधिक से अधिक केंद्रीय योजनाओं का उपयोग कर राज्य के बजट पर भार कम किया जाए।

कर्ज लेने की सीमा बढऩे से मिली राहत

कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से बने हालात को देखते हुए केंद्र सरकार प्रदेश को राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) का दो प्रतिशत अतिरिक्त कर्ज लेने की छूट दी है। इस तरह कर्ज लेने की यह सीमा करीब 5 प्रतिशत से अधिक हो गई है। इसके तहत राज्य सरकार अब सालाना करीब 45 हजार करोड़ का कर्ज लेने की स्थिति में है। वहीं बढ़ाई गई कर्ज सीमा अंतर्गत ही सालभर में 18 हजार 983 करोड़ रुपये जुटाए जा सकेंगे। इसमें चार हजार 746 करोड़ रुपये का कर्ज बिना शर्त लिया जा सकेगा। जबकि शेष के लिए कुछ सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। प्रदेश सरकार ने इसकी शुरुआत भी कर दी है।

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