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लॉकडाउन बढ़ने के साथ घटा संक्रमण, 8.5 से 3.5 फीसदी हुए पॉजिटव केस

भोपाल में पहले लॉकडाउन की तुलना में तीसरे लॉकडाउन में टेस्ट के पॉजिटिव रिपोर्ट आने की दर 8।5 प्रतिशत से घटकर 3।5 फीसदी रह गई है।

लॉकडाउन  बढ़ने के साथ घटा संक्रमण, 8.5 से 3.5 फीसदी हुए पॉजिटव केस
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भोपाल। कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन को बढ़ाकर 17 मई तक कर दिया गया है। 22 मार्च को पीएम मोदी ने जनता कर्फ्यू लगाया। देशभर के लोगों ने इस कर्फ्यू को सफल बनाया। जनता कर्फ्यू के सफल होने से ये बात साफ समझ में आ गई की जनता भी कोरोना संक्रमण को लेकर गंभीर है। मध्यप्रदेश सरकार भी कोरोना को लेकर पहले से ही हाई अलर्ट पर थी। यह देखा गया कि पहले लॉकडाउन की तुलना में तीसरे लॉकडाउन में टेस्ट के पॉजिटिव रिपोर्ट आने की दर 8।5 प्रतिशत से घटकर 3।5 फीसदी रह गई है। राज्य में कोरोना एडवायजऱी साल की शुरूआत में ही जारी कर दी गई है। लेकिन जबलपुर में कोरोना का पहला मामला 20 मार्च को मिला, जहां 4 मरीज़ एक साथ पॉजिटिव मिले। धीरे धीरे राजधानी समेत अन्य जिलों में संक्रमण बढ़ता गया और हाल यह हुआ कि पूरे देश भर में एमपी कोरोना संक्रमण के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया।

टेस्टिंग बढ़ाने से कंट्रोल हुआ कोरोना ग्राफ

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्णय लिया गया की कोविद-19 के संक्रमण को रोकने सर्वे, स्क्रीनिंग और सैंपलिंग को बढ़ाया जाए। सर्वे रिपोर्ट में ना केवल मरीज़ो से जुड़ी बल्कि शहर के हर जन की हर जानकारी को दर्ज किया जाए। इनपुट के आधार पर संदिग्धों को चिन्हित किया जाए। इसके साथ ही क्वारंटाइन में रखा जाए। मॉनिटरिंग के आधार पर सैंपलिंग कराई जाए। ऐसा करने से पॉजिटिव केसों की संख्या तो ज़रूर बढ़ी लेकिन राहत ये रही कि कोरोना का संक्रमण बढऩे से पहले ही मरीज़ अस्पताल पहुंच गया। इस कारण भोपाल में कोरोना के मरीज 14-16 दिन के अंदर स्वस्थय होकर घर भी लौट गए और शहर का रिकवरी रेट भी बढ़ता गया।

बढ़ता लॉकडाउन घटता संक्रमण

पहला लॉकडाउन 21 दिन का जारी हुआ। 24 मार्च से 14 अप्रैल तक के इस लॉकडाउन में संक्रमण तेज़ी से फैलता दिखा। लॉकडाउन वन में सर्वे, स्क्रीनिंग और सैंपलिंग का जो अनुपात था वो दूसरे लॉकडाउन की तुलना में कम था।संक्रमण का ग्राफ बढ़ते देखकर दूसरे लाकडाउन में सर्वे, स्क्रीनिंग और सैंपलिंग के 6 गुना बढ़ाया गया।

लॉकडाउन 2।0 में टेस्टिंग के चलते बढ़े मरीज

दूसरा लॉकडाउन 19 दिन का रहा जो 15 अप्रैल से 3 मई तक चला। टेस्टिंग बढऩे के कारण मरीज़ भी ज्यादा मिलने लगे। यह पीरियड राहत भरा रहा क्येंकि इसमें रिकवरी दर लगभग 20 प्रतिशत से ज्यादा सामने आया तो मृत्यु दर में करीब एक फीसदी कमी आई। ऐसे में अब ये उम्मीद जताई जा रही है कि 4 मई से शुरू हुए तीसरे लॉकडाउन के दौरान राजधानी में तेजी से सुधार होगा। जाहिर है कि शहरवासियों को भोपाल के जल्द रेड ज़ोन से ग्रीन ज़ोन में तब्दील होने जाने का इंतजार भी होगा।

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