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कोरोना पॉज़िटिव मिला फिर भी नहीं किया इलाके को सील, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

इंदौर में अब तक 1681 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं. 81 मरीजों की मौत हो चुकी है. प्रशासन ने इंदौर को दो हफ्ते तक रेड जोन में रखने का फैसला किया है.

कोरोना पॉज़िटिव मिला फिर भी नहीं किया इलाके को सील, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की मनीषपुरी कॉलोनी में रहने वाली दो बहनों में से एक कुछ समय पहले हैदराबाद से लौटी थी. वह कोरोना पॉजिटिव पाई गई है. इसके बाद दूसरी बहन में भी कोरोना के लक्षण पाए गए हैं. जिस क्षेत्र में ये दोनों संक्रमित मरीज मिले हैं, उनके घर के पास ही इंदौर के बीजेपी सांसद शंकर लालवानी का भी घर है. इसलिए प्रशासन ने इस इलाके को कंटेनमेंट जोन नहीं बनाया. इस इलाके में रास्ते बंद नहीं किए गए, जबकि दूसरी जिन जगहों पर कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं, उन जगहों को कंटेनमेंट एरिया बनाकर सील कर दिया गया है. इस इलाके को सांसद की वजह से खुला छोड़ दिया गया है. ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है.

कंटेनमेंट जोन का ये है नियम

कंटेनमेंट जोन वो इलाका होता है जहां कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस मिले हों और प्रशासन को लगता है कि वहां से और संभावित मामले सामने आ सकते हैं. ऐसे में उस इलाके को सील किया जाता है. एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर पुलिसबल तैनात किया जाता है. लोगों को वहां से आने-जाने की इजाजत नहीं होती है. इसका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. कंटेनमेंट जोन के तीन किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया जाता है. यहां किसी भी तरह की आवाजाही नहीं होती, लेकिन सबसे संक्रमित शहर इंदौर में सांसद ही वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है.

आधे से ज्यादा शहर बना कंटेनमेंट जोन

इंदौर में अब तक 1681 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं. 81 मरीजों की मौत हो चुकी है. यही वजह है कि आधे से ज्यादा शहर को कंटेनमेंट जोन में बदल दिया गया है. शहर के 85 वार्डों में से 79 वार्डों में कोरोना के मरीज मिल चुके हैं. सिर्फ 6 वार्ड ही सुरक्षित बचे हैं. ऐसे में शहर के लोगों को ज्यादा एहितयात बरतने की जरूरत है. लेकिन लोगों को मार्ग दिखाने वाले ही नियमों को नहीं मान रहे हैं. सांसद के घर के पास मरीज मिलने के बावजूद न कंटेनमेंट जोन बनाया गया है न पुलिस तैनात की गई है. लोग बेरोकटोक इलाके से निकल रहे हैं और यहां के लोग भी दूसरे इलाकों मे जा रहे हैं जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ गई है.

सांसद ने दी दलील

सांसद शंकर लालवानी के इलाके को कंटेनमेंट जोन इसलिए नहीं बनाया गया है, क्योंकि उन्हें घर से निकलना पड़ता है और लोगों की खैर खबर लेनी पड़ती है. अधिकारियों की बैठक में जाना पड़ता है. अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर लोगों से मिलना और जनसंपर्क करना पड़ता है. लोगों को एहसास कराना पड़ता है कि संकट की इस घड़ी में वे उनके लिए मसीहा बनकर आए हैं, इसलिए शायद इस इलाके को सील नहीं किया गया है. और तो और प्रशासन ने अपने आपको बचाने के लिए इस गली को ही मुख्य मार्ग बता दिया है. वहीं सांसद इसके पीछे तर्क दे रहे हैं कि कोरोना के मरीज उनके घर से 8-10 मकान दूर है. उनका परिवार सुरक्षित है और पूरी तरह से लॉकडाउन का पालन कर रहा है.

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