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उज्जैन टीआई यशवंत पाल की बेटी बनीं सब इंस्पेक्टर, नरोत्तम मिश्रा ने दी बधाई

गृहमंत्री ने अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने पर फाल्गुनी को समाज और प्रदेश की सेवा के लिए बधाई दी.

उज्जैन टीआई यशवंत पाल की बेटी बनीं सब इंस्पेक्टर, नरोत्तम मिश्रा ने दी बधाई
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उज्जैन। कोरोना से लड़कर शहीद हुए उज्जैन के नीलगंगा थाने के टीआई यशवंत पाल की बेटी को अब पिता के समान खाकी वर्दी पहनकर प्रदेश की सेवा करेंगी। मध्यप्रदेश के गृह एवं लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सुबह फाल्गुनी पाल सिंह से वीडियो कॉल के जरिए बात की। उन्होंने मुख्यमंत्री के माध्यम से अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने पर उनको समाज और प्रदेश की सेवा के लिए बधाई और आशीर्वाद भी दिया। गृहमंत्री से बातचीत के दौरान फाल्गुनी पाल भावुक हो गईं।

फाल्गुनी गृहमंत्री से बात करते हुए भावुक हुईं

मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने फाल्गुनी का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जो हो चुका है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन अब उन्हें सब इंस्पेक्टर बन कर न केवल अपने परिवार की मदद करनी है, बल्कि इस प्रदेश की सेवा भी करनी है। मंत्री से वीडियो कॉल पर बात करते हुए फाल्गुनी भावुक हो गईं।

टीआई पाल को कर्मवीर पदक

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने टीआई पाल के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा- इस दु:ख की घड़ी में पूरा प्रदेश उनके परिवार के साथ है। शोकाकुल परिवार को राज्य शासन की ओर से सुरक्षा कवच के रूप में 50 लाख रुपए, बेटी फाल्गुनी को पुलिस उपनिरीक्षक पद पर नियुक्ति और टीआई पाल को मरणोपरांत कर्मवीर पदक से सम्मानित किया जाएगा।

21 अप्रैल को इंदौर में ली थी टीआई पाल ने अंतिम सांस

कोरोना संक्रमण के शिकार होकर जान गंवाने वाले उज्जैन के नीलगंगा थाना प्रभारी यशवंत पाल (59) 12 दिन से तहसीलदार पत्नी मीना पाल (धार) और दोनों बेटी से दूर इंदौर के अरबिंदो हॉस्पिटल में उपचाररत थे। शहीद पाल इंदौर के टीआई शहीद देवेंद्र की ही तरह सीएए के खिलाफ उज्जैन के बेगमबाग में चल रहे धरने में लंबे समय तैनात रहे थे। फिर कोरोना संक्रमित क्षेत्र अंबर कॉलोनी में ड्यूटी की, तबीयत बिगड़ने पर दवाएं लेकर फर्ज निभाते रहे। 6 अप्रैल को संक्रमण की पुष्टि हाेने के बाद उन्हें अरडी गार्डी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इसके बाद उन्हें इंदौर के अरविंदो अस्पताल में शिफ्ट किया गया। 10 दिनों तक संघर्ष के बाद 21 अप्रैल को सुबह 5.45 बजे वे शहीद हो गए।

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