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पत्नी की नौकरी छुड़वाने के बाद क्यों पछताते हैं पति

पत्नी की नौकरी छुड़वाने के बाद क्यों पछताते हैं पति
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नई दिल्ली। आज के दौर की लड़कियां अपने करियर को लेकर काफी अवेयर रहती हैं। शादी के बाद भी वे घर और नौकरी को मैनेज करते हुए अपने सुरक्षित व खुशहाल भविष्य को सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं। पति और ससुराल का सपोर्ट मिले, तो उनके लिए दोनों को मैनेज करना आसान हो जाता है। हालांकि, ऐसे कई उदाहरण भी मौजूद हैं, जिनमें बच्चों के जन्म के बाद या फिर परिवार की जिम्मेदारी ज्यादा बेहतर तरीके से संभालने के लिए पत्नी की नौकरी छुड़वा दी जाती है। इन मामलों में ज्यादातर प्रेशर पति की ओर से आता है।

आमतौर पर ऐसे पुरुष मानते हैं कि पत्नी के हाउसवाइफ बनने पर उनकी फैमिली ज्यादा बेहतर तरीके से मैनेज हो सकेगी और यह उन्हें अपने काम और करियर पर बिना टेंशन के ध्यान लगाने में मदद करेगा। वे मानते हैं कि घर के खर्चों को अकेले उठाने में वे समर्थ हैं। हालांकि, वे इस बात से अंजान रहते हैं कि यह फैसला कैसे उनके और पत्नी के भविष्य पर असर डालते हुए, फैमिली लाइफ को मुश्किल बना सकता है।

फाइनेंशल प्रेशर बढ़ना: पत्नी की नौकरी भले ही आप ये सोचकर छुड़वाएं कि आपकी सैलरी इतनी है कि सब मैनेज हो जाएगा, लेकिन क्या आपने ये अच्छे से सोच लिया है दरअसल, दो लोग जब कमाते हैं, तो दोनों अपने खर्चों के साथ ही घर के खर्चे भी मिलकर उठाते हैं। इससे दोनों पर ही ज्यादा फाइनेंशल प्रेशर नहीं आता है। वहीं अगर कमाने वाला एक हो, तो उसे वर्तमान से लेकर भविष्य के सभी खर्चों को अकेले ही उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

ऐसे कई मामले देखने को मिलते हैं जिनमें पति अपनी पत्नी की नौकरी छुड़वा तो देते हैं, लेकिन जब बच्चों की पढ़ाई, उनकी करियर से जुड़ी जरूरतें, बढ़ती उम्र के कारण होने वाली मेडिकल प्रॉब्लम्स और रिटायरमेंट के बाद के खर्चों के कारण उन पर जबरदस्त मानसिक व आर्थिक दबाव पड़ने लगता है, तो वे अपने निर्णय पर पछताने लगते हैं।

पत्नी से दूरी: जब पति और पत्नी दोनों वर्किंग होते हैं, तो समय के साथ वर्क कल्चर में होने वाले बदलावों से गुजरते हुए वे एक-दूसरे के सपोर्ट सिस्टम बन जाते हैं। वहीं जब पत्नी को नौकरी छोड़े समय हो जाता है, तो वह इन बदलावों से अछूती रह जाती है, जिससे पति जब अपनी समस्याएं बताता है, तो वह उससे रिलेट नहीं कर पातीं। इससे धीरे-धीरे पति अपनी जॉब से जुड़ी समस्याओं को घर पर बताना बंद कर देता है। उसे लगता है कि पत्नी उसे समझती नहीं और यह सोच रिश्ते में दूरी लाने का कारण बन जाता है।

दूसरी ओर पत्नी की जिंदगी में भी काम से जुड़ी टेंशन की जगह घर से जुड़ी परेशानियां ले लेती हैं। फैमिली लाइफ को स्मूदली चलाने के लिए वह भी जबरदस्त स्ट्रेस से गुजरती हैं, लेकिन चूंकि पति काम के टेंशन में होता है, तो वह ज्यादातर समय पत्नी को सपोर्ट देने में असमर्थ नजर आता है। ऐसा जब होता है तो पत्नी को अकेलापन महसूस होने लगता है। उसे लगता है कि सारी जिम्मेदारियां उसकी अकेले की हैं। वह धीरे-धीरे अपनी लाइफ में पति को शरीक करना कम कर देती है, जो दोनों को दूर कर देता है।

आप नहीं रहे तो: सोचने में अजीब लगता है ना लेकिन अगले ही पल क्या होने वाला है इसका अंदाजा कोई भी नहीं लगा सकता। आप खुद सोचिए कि अगर आप नहीं रहे, तब आपके परिवार को कौन संभालेगा जॉब छोड़े अगर पत्नी को सालों हो गए हों, तो उन्हें इतने गैप के बाद रोजगार कैसे मिलेगा।

जब ऐसा होगा तब पत्नी और बच्चों के लिए समय कितना कठिन हो जाएगा, जरा इस बारे में सोचकर देखें। वहीं अगर पत्नी नौकरी करती रहे, तो उसे आपके जाने के बाद कम से कम आर्थिक सहायता के लिए किसी के सामने हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे।

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