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सावन के पहले सोमवार में शिवालयों में जुटे श्रद्धालु, सोशल डिस्टेंसिंग को नजरअंदाज कर मंदिरों के बाहर जुटी भीड़

सावन के पहले सोमवार में शिवालयों में जुटे श्रद्धालु, सोशल डिस्टेंसिंग को नजरअंदाज कर मंदिरों के बाहर जुटी भीड़
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प्रयागराज. सावन का पवित्र महीना सोमवार से शुरू हो गया है। ऐसे में सावन शुरू होने के साथ पहले सोमवार को ही शिवालयों में श्रद्धालु जुटे। गंगा से जल भरकर श्रद्धालु मंदिरों में जल, बेल पत्र, धतूरा आदि भगवान शिव को चढ़ाने मंदिरों में पहुंचे। मंदिरों में दर्शन व पूजन कर श्रद्धालुओं ने कोरोना से मुक्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की। मनकामेश्वर, पड़िला महादेव समेत तमाम मंदिरों में श्रद्धालु पूजन के लिए पहुंचते रहे।

सावन के पहले सोमवार भगवान भोले के भक्त शिवालयों की ओर रुख किए रहे। मनकामेश्वर मंदिर में बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं से सामाजिक दूरी का पालन कराया गया। यहां श्रद्धालुओं को जल, फूल व प्रसाद चढ़ाने पर रोक लगाई गई। ये चीजें लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के सामान बाहर ही रखवा दिए गए। वहीं, पड़िला महादेव मंदिर में दर्शन को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर पुलिस को मंदिर के कपाट बंद कराने पड़े।

136 वर्ष बाद श्रावण का आरंभ व अंत सोमवार को

भगवान शिव का स्तुति पर्व श्रावण मास सोमवार (आज) से आरंभ हो रहा है। तीन अगस्त तक चलने वाले श्रावण में शिव का ध्यान, पूजन, भजन, अभिषेक व दर्शन करने वाले भक्तों को मनोवांछित फल मिलेगा। पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय का दावा है कि अबकी 136 साल बाद दुर्लभ संयोग बना है, जब श्रावण मास का आरंभ व अंत सोमवार के दिन से होगा। इसमें पांच सोमवार का संयोग बन रहा है। यह शिव का प्रिय दिन है।

हर सोमवार गृह-नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग

प्रत्येक सोमवार पर गृह-नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। श्रावण मास में हर वर्ष शिव भक्त कांवरिया गंगा व संगम में स्नान करके कांवर में जल भरकर काशी व बाबा धाम जलाभिषेक करने जाते थे। कोरोना संक्रमण के कारण कांवरियों का जत्था इस बार नहीं निकलेगा।

वहीं, आचार्य विद्याकांत पांडेय कहते हैैं कि सच्चे हृदय से माह भर शिव की स्तुति में लीन रहना चाहिए। सोमवार को व्रत रखने वाले पुरुषों को 'ओम नम: शिवाय व महिलाओं को 'नम: शिवाय का मन में हर समय जप करना चाहिए।

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