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योगी सरकार ने विकास दुबे के एनकाउंटर को बताया सही, कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

योगी सरकार ने विकास दुबे के एनकाउंटर को बताया सही, कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
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लखनऊ। कानपुर के बिकरु गांव में दो जुलाई की रात मुठभेड़ में सीओ समेत आठ पुलिसवालों की हत्या करने के आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे का 10 जुलाई की सुबह यूपी एसटीएफ ने एनकाउंटर कर दिया था। लेकिन इसके बाद विपक्ष ने एनकाउंटर को फेक बताते हुए योगी सरकार को घेरने की कोशिश की। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई गई है। शुक्रवार को योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर हलफनामा दाखिल कर दिया है। वहीं, जांच प्रक्रिया भी तेज हो गई है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) लखनऊ की एक टीम ने विकास दुबे के मामा प्रेमप्रकाश पांडेय और भाई अतुल दुबे के एनकाउंटर वाली जगह पर सीन का रिक्रिएशन किया।

विकास दुबे का एनकाउंटर फेक नहीं

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में योगी सरकार ने कहा है कि, कानपुर शूटआउट के बाद हुए सभी एनकाउंटर सही हैं। इसको लेकर किसी तरह का संशय नहीं रहे, इसके लिए सरकार ने सभी तरह का कदम उठाए हैं। एसआईटी का गठन किया गया है। इसके अलावा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश शशिकांत अग्रवाल के नेतृत्व में कमीशन बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन किया गया है।आत्मरक्षा में हिरासत से पुलिस के हथियार छीनकर भाग रहे दुर्दान्त अपराधी विकास दुबे पर पुलिस ने गोली चलाई थी।

एनकाउंटर के बाद सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक न्यायिक आयोग गठित किया है, जो कि एनकाउंटर की जांच कर रहा है। दूबे के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों की सूची कोर्ट को दी गई है। इसके अलावा एनकाउंटर के समय घटनास्थल पर पलटी पुलिस की गाड़ी की फोटो, विकास दुबे के शव की फोटो, विकास दुबे ने जिन आठ पुलिस वालों की हत्या की, उनके शवों की फोटो कोर्ट में जमा की गई है।

उज्जैन से हुआ था गिरफ्तार

उज्जैन से गिरफ्तारी के बाद 10 जुलाई की सुबह कानपुर लाते समय विकास दुबे ने हादसे के बाद भागने की कोशिश की थी। जिस पर उसका एनकाउंटर कर दिया गया था। इसके बाद एनकाउंटर को फेक बताते हुए मुंबई के एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कोई आदेश दे सकता है।

एनकाउंटर स्थल का लिया जायजा

शूटआउट के बाद विकास दुबे और उसके साथी बिकरु गांव से फरार हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया था। पुलिस को पता चला कि, विकास दुबे के मामा प्रेम प्रकाश पांडेय और उसका चचेरा भाई अतुल पास के एक जंगल में काशीपुर नेवादा गांव के पास छिपे हैं तो उन्हें घेर लिया गया था। पुलिस ने सरेंडर करने के लिए कहा तो फायरिंग की गई थी। इस दौरान आईजी मोहित अग्रवाल बाल-बाल बचे थे।

जवाबी फायरिंग में प्रेम प्रकाश और अतुल मारा गया था। शुक्रवार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की टीम ने दोनों के एनकाउंटर स्थल से साक्ष्य जुटाए और क्राइम सीन का रिक्रिएशन किया। इस दौरान वह सभी पुलिसकर्मी मौजूद थे, जो एनकाउंटर करने वाली टीम में शामिल थे।

दर्ज होगा बयान

कानपुर शूटआउट की जांच कर रही एसआईटी का लखनऊ के लखनऊ में बापू भवन सचिवालय में चौथे मंजिल पर 401 कमरे में दफ्तर बनाया गया है। एसआईटी ने कहा कि, 20 जुलाई से 25 जुलाई तक दोपहर 12 बजे से दो बजे तक घटना से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किया जाएगा। कोई भी घटना से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध करा सकता है। 0522 2214540 नंबर पर फोन करके भी जानकारी दी जा सकती है। एसआईटी ने अपना मेल आईडी sit-kanpur@up.gov.in भी जारी की है।

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