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पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की विधान परिषद सदस्यता खत्म

पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की विधान परिषद सदस्यता खत्म
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लखनऊ। बसपा से बगावत कर कांग्रेस में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी की मंगलवार को यूपी विधान परिषद की सदस्यता गंवानी पड़ी। विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने दलबदल आरोपों के तहत उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। बसपा प्रमुख मायावती से विवाद के बाद नसीमुद्दीन ने 22 फरवरी 2018 को कांग्रेस में शामिल हो गए थे, जबकि वह बसपा के कोटे से एमएलसी बने थे। इस मामले में 9 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 15 दिन के भीतर विधान परिषद सभापति को फैसला लेने का निर्देश दिया था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी 23 जनवरी 2015 को बसपा कोटे से एमएलसी बने थे।

2 साल 5 माह बाद सिद्दीकी पर हुई कार्रवाई

10 मई 2017 को बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे को मायावती ने पार्टी से बर्खास्त कर दिया था। माया ने सिद्दीकी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया था। इसके बाद सिद्दीकी ने मायावती पर 50 करोड़ रुपए की मांग का आरोप लगाते हुए कई ऑडियो मीडिया के सामने लाए थे। 10 महीने बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस ज्वाइन की थी। इससे पहले उन्होंने सपा और भाजपा का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन उन्हें एंट्री नही मिली थी।

हाईकोर्ट की सख्ती पर नरम पड़े सभापति

कांग्रेस का दामन थामने के बाद बसपा ने सिद्दीकी की सदस्यता रद्द करने के लिए विधान परिषद के अध्यक्ष के समक्ष याचिका दाखिल की थी। बसपा का आरोप है कि सभापति ने अपना फैसला 29 मई 2019 को ही सुरक्षित रख लिया था, लेकिन सुनाया नहीं। आखिरकार बसपा ने हाईकोर्ट का रुख किया। 9 जुलाई को लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति पीके जायसवाल और न्यायमूर्ति डीके सिंह की पीठ ने कहा कि अगर विधान परिषद के सभापति तय समय के अंदर फैसला नहीं लेते हैं, तो अदालत को याचिकाकर्ता बीएसपी की याचिका पर विचार करना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि 15 दिनों के अंदर मामले का निस्तारण का कोर्ट को सूचित किया जाए। जिसके बाद आज यह फैसला सामने आया है। लगभग 2 साल 5 महीने बाद सिद्दीकी पर कार्रवाई हो सकी है।

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