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विकास दुबे के सहयोगी जय वाजपेयी की बेनामी संपत्तियों की जांच करेंगे इनकम टैक्स और ईडी

विकास दुबे के सहयोगी जय वाजपेयी की बेनामी संपत्तियों की जांच करेंगे इनकम टैक्स और ईडी
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लखनऊ। कानपुर में आठ पुलिसवालों की हत्या का मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे भले ही पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो चुका है पर उसकी काली कमाई का साम्राज्य अब भी खड़ा है। अब विकास के खजांची जय वाजपेयी की संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। पुलिस को विकास के लाखों रुपए जय वाजपेयी के खाते में जमा कराने के सबूत मिले हैं, जिसके बाद उस पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने जय वाजपेयी की संपत्तियों की जांच के लिए प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग को पत्र लिखा है।

जय वाजपेयी कानपुर के नजीबाबाद क्षेत्र का रहने वाला है। पुलिस ने उसे विकास का सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा है। गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार, थाना नजीबाबाद के प्रभारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जय वाजपेयी के पिता के पास कुल सात बीघा जमीन है और जय पांच भाई हैं। जय ने इलेक्ट्रॉनिक की एक छोटी सी दुकान खोल रखी है। उसने वर्ष 2011 से 2019 के बीच सरकारी मूल्य की करीब 1.35 करोड़ की संपत्ति जुटाई है, इसमें मकान, दुकान, प्लाॅट और अन्य संपत्ति खरीदी गईं।

कई लग्जरी कार बरामद हुईं थीं

जय वाजपेयी के पास तीन लग्जरी कार हैं, इनमें ऑडी, फॉर्च्युनर और वर्ना अलग-अलग नामों से खरीदी गईं। इन वाहनों की कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपए है। उसके नाम पर रिवाॅल्वर का लाइसेंस भी है। वहीं, विकास ने 30 नवंबर, 2019 को जय वाजपेयी के खाते में पांच लाख रुपए जमा कराए थे और इसी दिन जय की पत्नी श्वेता वाजपेयी के खाते में पांच लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। इससे साफ है कि काली कमाई से जय के संपत्तियां जुटाने की बात प्रथम दृष्टया सही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आठ साल में जय वाजपेयी करोड़पति कैसे बन गया।

अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने पत्र लिखा

अपर मुख्य सचिव गृह अवस्थी ने इन तथ्यों के सामने आने के बाद ही 25 जुलाई को प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) लखनऊ के संयुक्त निदेशक को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने जय वाजपेयी की काली कमाई से जुड़ी संपत्तियों का ब्योरा साझा किया और जांच कर कार्रवाई से शासन को अवगत कराने को कहा। इसी तरह मुख्य आयकर आयुक्त को पत्र लिखकर जय की संपत्तियों की जांच के लिए कहा गया है। जय की संपत्तियों की विस्तृत जांच के लिए एसएसपी कानपुर ने 24 जुलाई को शासन को पत्र लिखकर ईडी और आयकर विभाग को भी जांच में शामिल कराए जाने की मांग की थी।

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