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यूपी के ढाई लाख के इनामी बदन सिंह बद्दो की फरारी मामले में पांच पुलिसकर्मी बर्खास्त

यूपी के ढाई लाख के इनामी बदन सिंह बद्दो की फरारी मामले में पांच पुलिसकर्मी बर्खास्त
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लखनऊ। पुलिस अभिरक्षा से फरार ढाई लाख के मोस्ट वांटेड बदमाश बदन सिंह बद्​दो के मामले में शासन ने पांच पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद रहे बद्दो को डेढ़ साल पहले गाजियाबाद न्यायालय में पेशी पर ले जाया गया था। वापसी में बद्दो पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फिल्मी अंदाज में फरार हो गया था। उस समय सुरक्षा में रहे पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। तब से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। लेकिन कानपुर शूटआउट के बाद जांच में तेजी आई। इससे पहले गार्द के प्रभारी दरोगा को बर्खास्त किया जा चुका है। अब गार्द में शामिल एक दीवान, तीन सिपाही और ड्राइवर को बर्खास्त कर दिया गया है।

27 मार्च को पेशी पर गाजियाबाद गया था बद्दो

कुख्यात बदन सिंह बद्दो मेरठ के टीपी नगर के पंजाबीपुरा का रहने वाला है। वह फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे 27 मार्च 2019 को गाजियाबाद न्यायालय में पेशी के लिए ले जाया गया था। वहां से 28 मार्च को बदन सिंह पुलिसकर्मियों से साठगांठ कर मेरठ पहुंच गया। वहां एक होटल में पार्टी के दौरान वह फरार हो गया था। इस मामले में दारोगा देशराज त्यागी, दीवान संतोष कुमार, सिपाही राजकुमार, ओमवीर, सुनील कुमार और चालक आरक्षी भूपेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया था। बाद में सभी बहाल कर दिए गए, लेकिन तैनाती नहीं की गई।

31 जुलाई को दरोगा देशराज त्यागी को सेवानिवृत्ति के दिन ही पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बर्खास्त कर दिया था। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारी कर्मचारियों की दंड एवं अपील नियमावली 1991 के आधार पर गार्द में शामिल हेड कांस्टेबल (दीवान) संतोष कुमार, सिपाही सुनील सिंह, राज कुमार, ओमवीर सिंह और ड्राइवर भूपेंद्र को बर्खास्त कर दिया गया है।

28 मार्च को जारी हुआ था लुक आउट नोटिस, कौन है बद्दो?

बदन सिंह बद्दो के खिलाफ 28 मार्च 2020 को लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। उस पर फिरौती, हत्या, हत्या की कोशिश, अवैध हथियार रखने और उनकी आपूर्ति करने और बैंक डकैती जैसे 40 के करीब अन्य मामले दर्ज हैं। जहां तक अपराध की दुनिया में बद्दो का इतना बड़ा नाम होने की बात है तो यह कभी वक्त मेरठ की गलियों का छोटा-मोटा गुंडा था। हुआ यूं कि 1970 में पंजाब के अमृतसर से मेरठ आकर इसके पिता ने ट्रांसपोर्ट का धंधा शुरू किया था। सात भाइयों में सबसे छोटा बदन सिंह भी पिता के काम से जुड़ गया। इसके बाद वह अपराधियों के संपर्क में आया था। 80 के दशक में वह मेरठ के मामूली बदमाशों के साथ मिलकर शराब की तस्करी किया करता था। इसके बाद वह पश्चिमी यूपी के कुख्यात गैंगस्टर रविंद्र भूरा के गैंग में शामिल हो गया।

1988 में सबसे पहले उस पर हत्या का मामला दर्ज किया गया। बताया जाता है कि व्यापार में मतभेद होने पर राजकुमार नामक एक व्यक्ति को दिनदहाड़े गोली मार दी थी। इसके बाद उसने 1996 में वकील रविंद्र सिंह हत्या कर दी। इसी केस में 31 अक्टूबर 2017 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, लेकिन वह महज 17 महीने बाद ही फरार हो गया। सूत्रों की मानें तो फिलहाल वह देश छोड़कर विदेश भाग गया है और उसकी लास्ट लोकेशन नीदरलैंड की बताई जा रही है। वहीं बैठकर अपने लोकल गुर्गों जरिए क्राइम की दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

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