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कर्नाटक कैडर के आईएएस अनुराग तिवारी की मौत मामले में सीबीआई विशेष अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को किया खारिज

कर्नाटक कैडर के आईएएस अनुराग तिवारी की मौत मामले में सीबीआई विशेष अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को किया खारिज
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लखनऊ। तीन साल पहले राजधानी लखनऊ में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई कर्नाटक कैडर के आईएएस अनुराग तिवारी की मौत मामले की विवेचना फिर से होगी। गुरुवार को सीबीआई के विशेष न्यायिक मैजिस्ट्रेट सुव्रत पाठक ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और अग्रिम विवेचना के निर्देश दिए। दरअसल, अनुराग के भाई मयंक तिवारी ने सीबीआई की विशेष अदालत में प्रोटेस्ट याचिका दायर की थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने बीते 27 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

यह थी घटना

17 मई, 2017 की सुबह लखनऊ में हजरतगंज थाना क्षेत्र में मीराबाई मार्ग पर अनुराग तिवारी का शव सड़क किनारे संदिग्ध हालात में मिला था। वह दो दिन से स्टेट गेस्ट हाउस के कमरा नंबर-19 में ठहरे थे। 25 मई, 2017 को मयंक तिवारी ने अपने आईएएस भाई अनुराग तिवारी की मौत के मामले में हजरतगंज कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मयंक ने आरोप लगाया था कि उनके भाई के पास कर्नाटक के एक बड़े घोटाले की फाइल थी। उन पर इस फाइल पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा था। परिवार की मांग पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच सीबीआई को सौंपी थी।

सीबीआई ने जांच के बाद कर दिया था केस बंद

फरवरी 2019 को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सीबीआई ने यह कहते हुए केस बंद कर दिया था कि मृतक द्वारा किसी बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने या उनके बड़े अफसरों द्वारा मृत्यु का भय होने के आरोपों की मौखिक, लिखित तथा तकनीकी साक्ष्यों से पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि अनुराग के बड़े भाई मयंक तिवारी ने आरोप लगाया कि विवेचक ने पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण से हत्या को दुर्घटना बताने के लिए उद्देश्य से विवेचना की थी।

मयंक की वकील डॉक्टर नूतन ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई द्वारा विवेचना के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरंदाज किया गया था। सीबीआई ने कई सारे तथ्यों एवं साक्ष्यों को दरकिनार किया, कई महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्यों को छोड़ दिया और पोस्ट मार्टम रिपोर्ट की जानबूझ कर गलत व्याख्या की। प्रोटेस्ट प्रार्थनापत्र में विवेचना की समस्त खामियों को प्रस्तुत करते हुए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए एसपी रैंक के अधिकारी से विवेचना करवाए जाने की प्रार्थना की गयी। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

एम्स की मेडिकल रिपोर्ट का भी किया था जिक्र

सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में लिखा था कि अनुराग की मौत के बारे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर एम्स के डॉक्टरों के पैनल से राय ली गई थी। इन डॉक्टरों ने भी कहा कि हत्या या आत्महत्या जैसी कोई बात इसमें नहीं दिख रही है। डॉक्टरों ने ही सीबीआई को अपनी राय दी कि अनुराग की मौत अचानक सड़क पर गिरने से होना पाया गया है। सीबीआई ने कहा कि अनुराग के परिवारीजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के सभी पहलुओं की जांच की गई पर ये सब निराधार ही पाए गए। भाई मयंक सीबीआई को इस बात का भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका कि घटना के पांच दिन बाद एफआईआर क्यों लिखायी थी।

सीबीआई ने अनुराग को ईमानदार बताया: सीबीआई ने अपनी 23 पन्ने की क्लोजर रिपोर्ट में अनुराग तिवारी को ईमानदार अधिकारी बताया और सीबीआई ने लिखा है कि नौकरी के 10 साल में अनुराग का सात-आठ बार तबादला हुआ था।

यह सवाल उठे थे अनुराग की मौत पर

कर्नाटक के आईएएस लखनऊ में रुके, किसी को पता नहीं?

सुबह फ्लाईट पकड़नी थी तो टहलने क्यों जाएंगे?

मौत के बाद भी फोन कौन उठाता रहा?

मोबाइल कमरे में क्यों छोड़ गए थे?

पुलिस ने एक्सीडेंट क्यों बताया था?

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