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महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों के चौराहों पर पोस्टर लगेंगे, महिला पुलिसकर्मियों से ही कराया जाएगा दंडित

महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों के चौराहों पर पोस्टर लगेंगे, महिला पुलिसकर्मियों से ही कराया जाएगा दंडित
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब महिलाओं-बच्चियों के साथ अपराध करने वालों की खैर नहीं है। अब राज्य में 'ऑपरेशन दुराचारी' चलाया जाएगा। इसके तहत महिलाओं-बच्चियों के साथ दुष्कर्म या अन्य अपराध करने वाले आरोपियों के पोस्टर चौक-चौराहों पर सार्वजनिक किए जाएंगे। इसके अलावा मददगारों के नामों का भी खुलासा होगा। चौकी इंचार्ज से लेकर सर्किल के अफसर की जिम्मेदारी भी तय होगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। आरोपियों को महिला पुलिसकर्मी से दंडित भी कराया जाएगा।

गुरुवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने एंटी रोमियो स्क्वॉड की समीक्षा की। सीएम योगी ने कहा कि, जिस तरह से एंटी रोमियो स्क्वॉड ने बेहतरीन काम किया, मनचलों और महिलाओं के साथ अपराध करने वालों की कमर तोड़ दी है, वैसे ही हर जनपद की पुलिस यह अभियान चलाती रहे। सीएम ने सख्त लहजे में कहा कि, कहीं भी महिलाओं के साथ कोई आपराधिक घटना हुई तो संबंधित बीट इंचार्ज, चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और सीओ जिम्मेदार होंगे।

एंटी रोमियो स्क्वॉड पहले एक्टिव, फिर गायब

मार्च 2018 तक एंटी रोमियो स्क्वॉड ने 26 लाख 36 हजार से ज्यादा लोगों की चेकिंग की थी। यह भी गौर करने वाली बात है कि 2017 से 18 के बीच जब स्क्वॉड काफी सक्रिय था, तब यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले काफी बढ़ गए। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में 9,075 से 11,249 तक इजाफा हो गया। एंटी रोमियो स्क्वॉड पहले एक्टिव ज्यादा दिखी थी, जो अभी सड़कों पर नहीं दिखाई पड़ रही है। एंटी रोमियो स्क्वॉड ने 22 मार्च 2017 से 15 मार्च 2020 तक यूपी के 10 जोन में कुल 79 लाख 42 लाख 124 लोगों की चेकिंग की। जिसमें 10, 831 लोगों की गिरफ्तारी हुई और 33 लाख 34 हजार 852 लोगों को चेतावनी जारी की गई।

यूपी पुलिस का दावा अपराध में आई कमी

सरकार से मिले आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लूट, रेप, हत्‍या और डकैती जैसे अपराधों में 99 फीसदी गिरावट आई है। बता दें कि इससे पहले यूपी में हर दिन महिलाओं के खिलाफ औसतन 162 मामले दर्ज होते थे। यूपी पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के पहले 6 महीने में यूपी में 19,761 आपराधिक मामले सामने आए थे। इनमें रेप के 1,224, शारीरिक शोषण के 4,883, छेड़छाड़ के 293 और घरेलू हिंसा के 6,991, हत्‍या के 1,088, अपहरण के 5,282, मामले शामिल थे।

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