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बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी बोले- फिर से मंदिर-मस्जिद की हो रही राजनीति

बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी बोले- फिर से मंदिर-मस्जिद की हो रही राजनीति
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अयोध्या। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण जारी है। वहीं, मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला भी अदालत के दरवाजे पहुंच चुका है। बुधवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में लखनऊ सीबीआई विशेष अदालत से फैसला आएगा। इससे पहले मंगलवार को बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने कहा कि, मस्जिद का विवाद 70 सालों में लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चला। जिसमें देश, मंदिर और मस्जिद के विवाद में पीछे हो गया। अब एक नया विवाद मथुरा और काशी का शुरू किया जा रहा है। यह वही लोग हैं जो हिंदू मुस्लिम को लड़ाना चाहते हैं। सरकार ने पहले ही तय किया है कि अब नया विवाद मंदिर मस्जिद का नहीं किया जाएगा तो अब इस तरीके का विवाद क्यों शुरू किया जा रहा है?

इकबाल अंसारी ने कहा कि, हमारी सरकार से मांग है जो जाति धर्म मंदिर मस्जिद विवाद करना चाहते हैं, उनके खिलाफ सरकार सख्त कानून का पालन करवाए। संविधान में बताया गया कि जहां मंदिर है तो वहां मंदिर रहेगा। जहां मस्जिद है वहां मस्जिद रहेगी। जो अब मंदिर और मस्जिद की बात करते हैं वह देश को तोड़ना चाहते हैं। इसमें वे राजनीतिक फायदा लेना चाहते हैं। अब देश के विकास, मिल फैक्ट्री बनाने की बात होनी चाहिए।

बाबरी विध्वंस के आरोपित शिवसेना के संतोष दुबे ने कहा है कि 6 दिसंबर 1992 को मसला हल हुआ, वैसे ही काशी और मथुरा का मसला भी हल करना होगा। काशी ओर मथुरा के लिए आंदोलन को तैयार हैं। सीबीआई कोर्ट जो फैसला सुनाएगा वह सिर माथे पर है। हमने बाबर का महज जिद तोड़ा, कोई अपराध नहीं किया। बाबर ने मंदिर तोड़ा था उसने अपराध किया था।

कृष्ण जन्मभूमि की कोर्ट में सुनवाई पर मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा कि हम विश्व बंधुत्व की बात करते हैं। लेकिन हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। हमारे हर आंदोलन के पीछे एक ही लक्ष्य राष्ट्र को अखंड बनाना है। राष्ट्र में समान आचार संहिता लागू होनी चाहिए। संत समाज हमेशा चाहता रहा है कि भाईचारे से अयोध्या के साथ-साथ काशी और मथुरा का भी मसला हल होता, लेकिन देश में विषमता है। इसके लिए समान नागरिक आचार संहिता लागू होना चाहिए।

विवादित ढांचा विध्वंस केस के फैसले को लेकर अलर्ट

सीबीआई के विशेष कोर्ट से बुधवार को 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाने के केस में आने वाले फैसले को लेकर राम की नगरी में अलर्ट जारी कर दिया गया है। डीआईजी दीपक कुमार के मुताबिक सीआईडी व एलआईयू की टीमें सादी वर्दी में तैनात कर दी गई। बाहरी तत्व अयोध्या में आकर माहौल न बिगाड़ने पाए इसको लेकर विरोध सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि लखनऊ की विशेष सीबीआई की अदालत 30 सितंबर को इस केस में फैसला सुनाएगी। उन्होंने बताया कि व्यापक स्तर पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को और सख्ती बरती जाएगी। जिसके तहत कोविड गाइडलाइंस को भी कड़ाई से लागू किया जाएगा। कहीं भी भीड़ नहीं इकट्ठा होने दी जाएगी। कोविड-19 प्रोटोकॉल व धारा 144 तहत कड़ी कार्रवाई होगी।

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