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टीआरपी फर्जीवाड़े की जांच के लिए दिल्ली से लखनऊ पहुंची सीबीआई की टीम

टीआरपी फर्जीवाड़े की जांच के लिए दिल्ली से लखनऊ पहुंची सीबीआई की टीम
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लखनऊ। लखनऊ में टीआरपी मामले में केस दर्ज होने के बाद सीबीआई ने इसकी जांच शुरु कर दी है। जांच कर रही सीबीआई की टीम ने हजरतगंज कोतवाली में दर्ज एफआईआर और केस डायरी समेत अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। टीम विवेचक से संपर्क कर जरूरी जानकारियां हासिल करेगी।

इंदिरानगर निवासी व विज्ञापन कंपनी गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के क्षेत्रीय निदेशक कमल शर्मा ने 17 अक्तूबर को हजरत गंज कोतवाली में FIR दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि कुछ चैनलों ने TRP का फर्जीवाड़ा कर अपनी रेटिंग बढ़ाकर दिखाई और विज्ञापन प्रभावित किया।

क्या है पूरा मामला

रिपब्लिक टीवी के स्वामित्व वाली कंपनी ARG आउटलाइर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और इसके एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी पिछले सप्ताह बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे और चैनल के खिलाफ मुंबई पुलिस की ओर से दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की। चैनल ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से याचिका पर सुनवाई से इनकार के बाद 16 अक्टूबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं में धोखाधड़ी, विश्वास का आपराधिक उल्लंघन और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों के तहत रिपब्लिक टीवी और इसके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस ने दो क्षेत्रीय चैनलों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है।

अब तक इस मामले में हुई 5 लोगों की गिरफ्तारी

इससे पहले मुंबई पुलिस ने 8 अक्टूबर को फॉल्स टीआरपी रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि रिपब्लिक टीवी समेत 3 चैनल पैसे देकर टीआरपी खरीदते थे और बढ़वाते थे। इस मामले में अबतक 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन चैनलों से जुड़े लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा। उधर, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने इन आरोपों को झूठा करार दिया।

कमिश्नर ने कहा कि हमें ऐसी सूचना मिली थी कि फेक प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने छानबीन की और इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। रिपब्लिक के प्रमोटर और डायरेक्टर के खिलाफ जांच की जा रही है। हिरासत में लिए गए लोगों ने यह बात कबूल की है कि ये चैनल पैसे देकर टीआरपी बदलवाते थे।

रोजाना 500 रुपए देने का लगा आरोप

कमिश्नर ने बताया कि जांच के दौरान ऐसे घर मिले हैं, जहां टीआरपी का मीटर लगा होता था। इन घरों के लोगों को पैसे देकर दिनभर एक ही चैनल चलवाया जाता था, ताकि चैनल की टीआरपी बढ़े। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ घर तो ऐसे पता चले हैं, जो बंद थे, उसके बावजूद अंदर टीवी चलते थे। एक सवाल के जवाब में कमिश्नर ने यह भी कहा कि इन घर वालों को चैनल या एजेंसी की तरफ से रोजाना 500 रुपए तक दिए जाते थे। मुंबई में पीपुल्स मीटर लगाने का काम हंसा नाम की एजेंसी को दिया हुआ था। इस एजेंसी के कुछ लोगों ने चैनल के साथ मिलकर यह खेल किया। जांच के दौरान हंसा के पूर्व कर्मचारियों ने गोपनीय घरेलू डेटा शेयर किया।

क्या है टीआरपी?

टीआरपी यानी टेलीविजन रेटिंग पॉइंट। यह किसी भी टीवी प्रोग्राम की लोकप्रियता और ऑडियंस का नंबर पता करने का तरीका है। किसी शो को कितने लोगों ने देखा, यह टीआरपी से पता चलता है।

यदि किसी शो की टीआरपी ज्यादा है तो इसका मतलब है कि लोग उस चैनल या उस शो को पसंद कर रहे हैं। एडवरटाइजर्स को टीआरपी से पता चलता है कि किस शो में एडवरटाइज करना फायदेमंद रहेगा।

सरल शब्दों में टीआरपी बताता है कि किस सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के कितने लोग कितनी देर किस चैनल को देख रहे हैं। यह एक घंटे में, एक दिन में या एक हफ्ते का कुछ समय हो सकता है।

चैनलों के लिए टीआरपी का क्या महत्व है?

टीआरपी से ही पता चलता है कि किस चैनल को कितने लोग देख रहे हैं। किस शो की लोकप्रियता ज्यादा है। इसी आधार पर वे अपना प्रमोशनल प्लान तैयार करते हैं और एडवर्टाइजमेंट देते हैं।

ज्यादा से ज्यादा एडवरटाइज चाहिए तो टीआरपी भी अच्छी होना आवश्यक है। इसकी वजह से ही ज्यादातर चैनल टीआरपी को महत्व देते हैं। जिसे ज्यादा लोग देख रहे हैं, उसे ही प्रमोट करते हैं।

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