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मथुरा में भाई-दूज पर भाई का हाथ पकड़ बहनों ने यमुना में लगाई डुबकी; लंबी उम्र का मांगा आशीष

मथुरा में भाई-दूज पर भाई का हाथ पकड़ बहनों ने यमुना में लगाई डुबकी; लंबी उम्र का मांगा आशीष
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मथुरा। उत्तर प्रदेश में यम द्वितीया (भाई-दूज) का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। लेकिन सोमवार को मथुरा में विश्राम घाट पर बहनों ने यम के फांस से मुक्ति के लिए भाइयों का हाथ पकड़कर यमुना नदी में डुबकी लगाई और लंबी आयु की कामना की। स्नान के बाद भाई-बहनों ने धर्मराजजी व यमुनाजी के मंदिर में दर्शन पूजन किए। घाट पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पीएसी व पुलिस के जवान मुस्तैद हैं। इस दौरान बस अड्डों पर भी भीड़ देखने को मिली।

दूर-दूर से लोग आते हैं यहां

यमराज, जिनका नाम लेने से भी कतराते हैं, आज उनकी भाई-बहनों ने उनकी पूजा अर्चना की। मौका है यम-द्वितीया का। जिसे भैया-दूज भी कहा जाता है। इस दिन मथुरा के विश्राम घाट पर एक विशेष स्नान होता है। जिसमें लाखों भाई-बहन एक साथ मिलकर यमुना के जल में स्नान करते हैं और घाट पर ही स्थित यमुना-यमराज मंदिर में पूजा कर मोक्ष-प्राप्ति की कामना करते हैं। इसके लिए सिर्फ मथुरा के आसपास से ही नहीं बल्कि सुदूर क्षेत्रों से व अन्य प्रांतों से लोग यहां पहुंचते हैं।

यह है स्नान की महत्ता व मान्यता

मान्यता है कि जब सूर्य पुत्र यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने यहां आए तो यमुनाजी ने उनका खूब आदर-सत्कार किया और दोनों ने इसी विश्राम घाट पर स्नान किया था। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन से वरदान मांगने को कहा तो यमुना जी ने वरदान मांगा था कि इस दिन इस घाट पर जो भाई-बहन मेरे जल से स्नान करेंगे, उनको यम फांस से मुक्ति मिलेगी और उनके सारे पाप दूर होकर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।

स्थानीय पुरोहित आचार्य शैलेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया कि बृज के चारों कोनों पर महादेव का वास होने के कारण यहां यम प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। ब्रह्म मुहूर्त में जब यहां ब्राह्मण यमुना स्नान करने के लिए आए तो कार्तिक माह की द्वितीया तिथि को यम भी उनके भेष में आ गए और अपनी बहन यमुना से मिलकर उनसे वर मांगने को कहा। इस पर यमुना जी ने कहा कि कार्तिक मास की द्वितीया तिथि को जो भाई-बहन साथ स्नान करें, उन्हें आपके दूत लेने नहीं आएं। तभी से मान्यता है कि विश्राम घाट पर दीवाली बाद इस तिथि को भाई बहन के स्नान करने से यम फांस से मुक्ति मिलती है।

दुनिया का इकलौता यमराज का मंदिर है यहां

पूरी दुनिया में यमराज का एक मात्र मंदिर है जो मथुरा के विश्राम घाट पर है। स्नान के बाद सभी भाई-बहन इस मंदिर में यमराज की पूजा कर यम फांस से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करते हैं। यही वजह है कि मोक्ष प्राप्ति की कामना के साथ यहां देश-विदेश से लाखों भाई-बहन आज के दिन स्नान करने पहुंचते हैं। सुबह चार बजे से शुरू होने वाला यम-द्वितीया स्नान देर शाम तक चलता है। हालांकि इस बार कोविड 19 के चलते प्रतिवर्ष की भांति बड़ी संख्या में भाई बहन स्नान के लिए नहीं पहुंचे। लेकिन प्रशासन और नगर निगम ने व्यापक इंतजाम किए हैं।

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