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ईओडब्ल्यू ने दिल्ली एयरपोर्ट से आरोपी दिनेश पांडे को किया गिरफ्तार, लुकआउट नोटिस जारी किया गया था

ईओडब्ल्यू ने दिल्ली एयरपोर्ट से आरोपी दिनेश पांडे को किया गिरफ्तार, लुकआउट नोटिस जारी किया गया था
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लखनऊ। बाइक बोट कंपनी के द्वारा हुए करोड़ों के घोटालों के मामले में EOW (आर्थिक अपराध शाखा) की लखनऊ शाखा ने एक और गिरफ्तारी की है। घोटालेबाज संजय भाटी और बीएन तिवारी का निवेशक दिनेश पांडे को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। ईओडब्ल्यू टीम को जानकारी मिलने के बाद दिनेश पांडेय दुबई दुबई भाग गया था। बयान न देने आ रहे दिनेश पांडे के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। आज दुबई से लौटते ही दिनेश पांडे को दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ लिया गया। इससे पहले बीते 19 नवम्बर को एक गिरफ्तारी हुई थी।

गिरफ्तार किया गया दिनेश पांडे ने जेनिथ टाउनशिप समेत अपनी कई कंपनियों में बाइक बोट की रकम निवेश की थी। दिनेश पांडेय ने बाइक बोट के घोटाले की रकम को नोबल कोऑपरेटिव बैंक में भी जमा कराया था। संजय भाटी और बीएन तिवारी ने दिनेश पांडे को निवेश के लिए 150 करोड रुपए दिए थे। दिनेश पांडेय मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार चल रहे थे।

निजी चैनल के मालिक बीएन तिवारी की तलाश में एसटीएफ लगाई गई

गिरफ्तार किए गए दिनेश पांडे के बयान के आधार पर लखनऊ के निजी चैनल के मालिक बीएन तिवारी की तलाश तेज कर दी गई। संजय भाटी के साथ बीएन तिवारी को भी दिनेश पांडे ने बताया बड़ा निवेशक है। जिसके बाद से मूलतः जौनपुर के रहने वाले लखनऊ में निजी चैनल के मालिक बीएन तिवारी की तलाश में यूपी एसटीएफ लगाई गई है। इससे पहले बीते 19 नवंबर को बाइक बोट घोटाले में वांछित रहे विजय कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया गया था।

ईओडब्लू की पूछताछ में दिनेश पांडे ने कबूला अपना जुर्म

ईओडब्ल्यू की पूछताछ में पकड़े गए अभियुक्त दिनेश पांडे ने बताया कि नोएडा में वर्ष 2012 से विजेंद्र कुमार हुड्डा के संपर्क में आया था वर्ष 2017 में बाइक बोर्ड प्रकरण शुरू हुआ तो दिनेश पांडे संजय भाटी विजेंद्र हुड्डा के साथ मिलकर अलग-अलग कंपनियों और संपत्तियों में पैसा निवेश किया।

उसकी कंपनी में लगभग 150 करोड़ आए थे उन पैसों का हिसाब पूछा क्या तो 60 करोड़ गर्वित व इंडिपेंडेंट टीवी को वापस करना तथा शेष बची रात को दिनेश पांडे ने जमीन जायदाद में स्टीवर्ट स्टोर में निवेश किया। दिनेश पांडे 2012 में हुआ जिसकी प्राइवेट लिमिटेड बनाने का काम करती थी। कंपनी में एक साथ काम करते थे टाउनशिप में निवेश करवाया था।

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