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यूपी बोर्ड के नतीजे घोषित, 10वीं में 83% और 12वीं में 74% छात्र पास; सरकार का ऐलान- 20 टॉपर्स के नाम पर सड़कों का नाम रखा जाएगा

यूपी बोर्ड के नतीजे घोषित, 10वीं में 83% और 12वीं में 74% छात्र पास; सरकार का ऐलान- 20 टॉपर्स के नाम पर सड़कों का नाम रखा जाएगा
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शनिवार को 10वीं और 12वीं के परिणाम जारी किए। 10वीं में 83.31% और 12वीं में 74.63% छात्र पास हुए हैं। 10वीं में 81.96% अंक लाकर बागपत की रिया जैन और 12वीं में बागपत के ही अनुराग मलिक ने 97% अंक लाकर टॉप किया है।

उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने रिजल्ट जारी करते हुए बताया कि कोरोना संकट के बावजूद 2 करोड़ 82 लाख उत्तर पुस्तिका को 21 दिनों में चेक किया गया है। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ऐलान किया है कि यूपी बोर्ड के टॉप-20 छात्रों के घर की सड़क को उनके नाम पर किया जाएगा।

हाईस्कूल में 7% तो इंटरमीडिएट में 13% ज्यादा पास हुई लड़कियां

हाईस्कूल में कुल 30,24,480 छात्र रजिस्टर्ड थे, जिसमें से 27 लाख 72 हजार 265 ने परीक्षा दी थी। इनमें 23 लाख 09 हजार 802 छात्र पास हुए हैं। पास होने वालों में 11,90,888 लड़के और 11,18,914 लड़कियां हैं। 79.88% लड़के और 87.29% लड़कियां पास हुईं।

इंटरमीडिएट में 25,86,339 छात्र दर्ज थे, जिनमें 24 लाख 84 हजार 479 ने परीक्षा दी थी। इसमें 18 लाख 54 हजार 099 (74.63%) छात्र पास हुए। इनमें 95,92,23 लड़के और 89,48,76 लड़कियां हैं। इस तरह 68.88% लड़के और 81.96% लड़कियां पास हुई हैं।

इस बार तुरंत नहीं मिलेगा मार्कशीट और सर्टिफिकेट

बोर्ड पहली मर्तबा डिजिटल हस्ताक्षर वाले मार्कशीट और सर्टिफिकेट जारी कर रहा है। ये छात्रों को नतीजे जारी होने के दो से तीन दिन के भीतर स्कूल से मिल जाएंगे। बोर्ड की ओर से यह निर्णय कोरोना संकट को देखते हुए लिया गया है। इससे पहले बोर्ड की ओर से परिणाम जारी होने के बाद 15 दिन के भीतर मार्कशीट और सर्टिफिकेट स्कूलों को भेज दिए जाते थे। स्कूलों से कहा गया है कि वह डिजिटल हस्ताक्षर वाली मार्कशीट और सर्टिफिकेट वेबसाइट से डाउनलोड करके छात्रों को दें।

इस साल बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 6 मार्च के बीच हुई थी। वहीं, पिछले साल 2019 में बोर्ड परीक्षाएं सात फरवरी से दो मार्च के बीच हुई थी। तब परीक्षा के 56 दिन बाद 27 अप्रैल को परिणाम जारी कर दिए गए थे। लेकिन, इस बार कोरोना के चलते न सिर्फ बोर्ड कॉपियों के जांचने में देरी हुई, बल्कि नतीजे भी 112 दिन बाद आए। 16 मार्च से कॉपियों की जांच होनी थी, लेकिन कोरोना के चलते यह काम 5 मई से शुरू हो पाया।

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