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निजीकरण के खिलाफ 15 लाख बिजली कर्मचारी हड़ताल पर, राजधानी में मंत्री-विधायकों के घरों समेत 10 जिलों में गुल रही बत्ती

निजीकरण के खिलाफ 15 लाख बिजली कर्मचारी हड़ताल पर, राजधानी में मंत्री-विधायकों के घरों समेत 10 जिलों में गुल रही बत्ती
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लखनऊ। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग को लेकर यूपी पावर कारपोरेशन प्रबंधन और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के करीब 15 लाख से अधिक बिजली कर्मचारी आज भी हड़ताल पर हैं। सोमवार को नोएडा से लेकर पूर्वी यूपी के बलिया, महाराजगंज समेत 10 जिलों में बत्ती गुल रही। वहीं, राजधानी के वीवीआईपी इलाकों में भी करीब दो घंटे बिजली ठप रही। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, स्वामी प्रसाद मौर्या, मोहसिन रजा सहित दो दर्जन मंत्रियों के आवासों पर अंधेरा रहा। साथ ही 60 से अधिक विधायकों व विधान परिषद सदस्यों की बिजली सप्लाई भी बाधित रही।

इन हालातों से निपटने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को ऊर्जा विभाग की बड़ी बैठक बुलाई है। इस बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी, प्रमुख सचिव ऊर्जा अरविंद कुमार और वित्त विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया है।

ऊर्जा मंत्री ने प्रस्ताव बनाया, चेयरमैन ने पेंच फंसाया

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि, ऊर्जा मंत्री पंडित श्रीकांत शर्मा के साथ सोमवार को संघर्ष समिति की वार्ता दोपहर तीन बजे से रात्रि साढ़े आठ बजे तक चली। सहमति के बिंदु तय हो गए थे। समझौते के अनुसार ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के या किसी अन्य निगम के विघटन-निजी करण का प्रस्ताव वापस लिया जाता है और प्रदेश में कहीं भी ऊर्जा क्षेत्र में कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। विद्युत वितरण कंपनियों की वर्तमान व्यवस्था में ही बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लेकर सुधार के कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

समझौते का पूरा प्रारूप तैयार हो गया। ऊर्जा मंत्री ने समझौते को पढ़ा और अंतिम रूप से इस पर उन्होंने अपनी स्वीकृति दिया। ऊर्जा मंत्री ने पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन को समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए निर्देश दिया और ऊर्जा मंत्री चले गए। लगभग एक घंटे तक इंतजार करने के बाद बार-बार आग्रह करने पर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन कमेटी रूम में आए और उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि वे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। यह पहली बार हुआ है जब ऊर्जा मंत्री के साथ समझौते की पूरी सहमति बन जाने के बाद समझौते का पूरा ड्राफ्ट बन जाने के बाद हस्ताक्षर करने से चेयरमैन ने मना कर दिया। यह पावर कारपोरेशन के चेयरमैन व प्रबंधन की हठवादिता है। जिससे ऊर्जा क्षेत्र में टकराव और अधिक बढ़ गया है। निजीकरण के विरोध में में एक ऐतिहासिक संघर्ष चल रहा है। कार्य बहिष्कार आंदोलन जारी रहेगा और यदि किसी भी स्थान पर किसी भी बिजली कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया किया गया या उत्पीड़न किया गया तो उसी समय अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ होगी और सामूहिक जेल भरो आंदोलन शुरू होगा।

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