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रोक के बावजूद गुपचुप तरीके से 150 से ज्यादा असिस्टेंट कमिश्नर और सैकड़ों कर्मियों के तबादले की फाइल बनी

रोक के बावजूद गुपचुप तरीके से 150 से ज्यादा असिस्टेंट कमिश्नर और सैकड़ों कर्मियों के तबादले की फाइल बनी
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा रोक के बाद भी वाणिज्यकर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर समेत कई पदों पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले की तैयारी शुरू हो गई है। गुपचुप तरीके से इनकी फाइल भी बना ली गई है। इसमें करीब 150 से ज्यादा असिस्टेंट कमिश्नर और सैकड़ों कर्मचारियों के तबादले करने की तैयारी है। बड़ी बात यह है कि इस पूरे मामले में बड़े और आला अधिकारियों ने खुद को बचा लिया है। सूत्रों के मुताबिक तीन साल पूरा होने के बाद भी डिप्टी और ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी इस पूरे सिस्टम से बाहर हैं और उनकी कोई फाइल तैयार नहीं की गई है।

12 मई को जारी आदेश अभी भी प्रभावी

वाणिज्य कर विभाग के कर्मचारी संघ नेता सुरेश सिंह यादव ने बताया कि शासन ने 12 मई 2020 के स्थानांतरण संबंधित आदेश दिया था। इसमें तय किया गया था मात्र सेवानिवृत्ति, मृत्यु, चिकित्सकीय सेवा, प्रोन्नति, त्यागपत्र, निलंबन एवं सेवा से पृथक किए जाने की स्थिति में स्थानांतरण किया जाएगा। यह आदेश अभी भी प्रभावी है। यहां तक कि केंद्र सरकार द्वारा भी वर्ष 2020-21 के लिए आधारों पर स्थानांतरण पर रोक लगाई गई है। ऐसे में ऐसी क्या आवश्यकता आ गई कि मुख्यालय से लेकर शासन तक गोपनीय ढंग से सचल दल असिस्टेंट कमिश्नर और अन्य कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे है। यहां तक एक ही जगह पर 3 वर्ष से तैनात डिप्टी एवं जॉइंट कमिश्नर इसको लागू नहीं किया जा रहा है।

बच्चों के एडमिशन से लेकर मकान खोजने में आएगी परेशानी

इस माहौल में तबादला करने से बच्चों के एडमिशन से लेकर मकान खोजने और शिफ्ट होने में परेशानी आएगी। ऐसे में इसका विरोध किया जा रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर लोग बच्चों का एडमिशन कराने के साथ प्राइवेट विद्यालयों की मोटी फीस भी भर चुके है। इससे उनको काफी नुकसान होगा। कई जिलों में वाणिज्यकर के लोगों को सरकारी आवास तक उपलब्ध तक नहीं होता है। ऐसे में मकान खोजना एक बड़ी चुनौती होगी।

कोरोना ड्यूटी में दूसरे जगह जाना ठीक नहीं

मुख्यालय पर तैनात सचल दल के अधिकारी ने बताया कि कोरोना काल में संवेदनशील स्थानों पर डयूटी लगाई गई है। अब सत्र के मध्य में इन अधिकारियों को हटा कर नए अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है तो प्रशासन को नए सिरे से समस्त ड्यूटी पुनर्निर्धारित करनी पड़ेंगी। इसमें भी परेशानी आएगी।

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