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रूह कंपा देने वाली दास्तां ... 180 किमी पैदल चली, सड़क पर जन्मा बच्चा, गोद में उठाया मासूम, फिर पैदल चली 270 किमी, अभी हज़ार किमी सफर बाकी

रूह कंपा देने वाली दास्तां ... 180 किमी पैदल चली, सड़क पर जन्मा बच्चा, गोद में उठाया मासूम, फिर पैदल चली 270 किमी, अभी हज़ार किमी सफर बाकी
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अलीगढ . प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में महिला मजदूर चंडीगढ़ से मध्य प्रदेश के लिए पैदल चल पड़ी। करीब 180 किमी पैदल चलने के बाद महिला को दर्द हुआ तो उसने सड़क किनारे ही साथियों की मदद से बेटी को जन्म दिया। जन्म के एक घंटे बाद ही बच्ची को गोद में लेकर वह 270 किलोमीटर पैदल चलकर अलीगढ़ पहुंची। यहां कुछ देर रुककर एमपी तक अभी एक हज़ार किमी से ज्यादा का सफर करना बाकी है।

सोमवार रात में नवजात बच्चे के साथ अलीगढ़ पहुंची महिला मजदूर की कहानी रूह कंपाने वाली है। बच्चे के जन्म के एक घंटे बाद ही उसे गोद में लेकर महिला 270 किलोमीटर तक पैदल चल पड़ी। यहां भी चंद मिनट रुकने के बाद मंजिल की ओर चल पड़ी। अलीगढ़ के क्वार्सी चौराहे पर छह दिन के बच्चे को गोद में लेकर बैठी महिला का नाम मान कुमार है। वह अपने पति के साथ चंडीगढ़ में रहती है। लॉकडाउन के चलते एवं प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में वह अपने पति के साथ चंडीगढ़ से मध्य प्रदेश के लिए पैदल ही निकल पड़ी। वह पांच दिन पूर्व करीब 200 किमी का सफर तय करके उत्तराखंड के रूड़की में पहुंची थी। वहां पेट दर्द हुआ तो बच्ची को साथियों की मदद से जन्म दिया। इसके कुछ देर बाद ही मंजिल की ओर चल पड़ी।

अलीगढ़ पहुंची महिला ने जब क्वार्सी गांव में स्थानीय लोगों को अपनी कहानी सुनाई और मदद की गुहार लगायी। इसके बाद ग्रामीणों महिला का उसकी नवजात बच्ची व पति के साथ पूरा सम्मान दिया। इतना ही नहीं, टोली में शामिल करीब 50 लोगों के लिए हलवाई लगाकर खाना खिलाया। उसके बाद टोली मध्य प्रदेश की ओर रवाना हो गई।

नवजात को कपड़ों के साथ रास्ते का खाना पैक करके दिया

मान कुमारी के पति संजय ने बताया कि यात्रा बेहद कठिन थी लेकिन रास्ते में हमने दयालुता भी देखी। कई परिवारों ने नवजात के लिए कपड़े दिये तो कहीं ने खाना खिलाने के साथ पैक करके भी दिया। टोली लॉकडाउन के चलते काम न मिलने पर घर वापस जा रहे है।

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