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263 साल बाद पहली बार भक्तों को टीवी पर दर्शन देंगे कान्हा, मंदिरों में सूक्ष्म रूप से मनेगा कृष्ण का जन्मोत्सव

263 साल बाद पहली बार भक्तों को टीवी पर दर्शन देंगे कान्हा, मंदिरों में सूक्ष्म रूप से मनेगा कृष्ण का जन्मोत्सव
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मथुरा। योगेश्वर श्रीकृष्ण के धाम बृज में एक दिन बाद ही यानी 12 अगस्त को कान्हा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर बृजवासियों और दूरदराज बैठे कृष्ण भक्तों के मन में उत्साह है। वे नटखट कान्हा के जन्म के बाद पहला दर्शन भी करना चाहते हैं लेकिन, कोरोना संक्रमण के खतरे ने इस उत्साह को ठंडा कर दिया है।

पिछले साल तक मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से लेकर वृंदावन तक भक्तों की अपार भीड़ रहती थी। हर तरफ श्रद्धालुओं का रैला दिखता था लेकिन, इस बार सब सूना है। मंदिरों में सजावट तो हुई है लेकिन, कान्हा का जन्मोत्सव इस बार जिला प्रशासन की गाइडलाइन के कारण सूक्ष्म तरीके से मनाया जाएगा। श्रद्धालु निराश न हों, इसलिए कान्हा दूर से ही टीवी पर दर्शन देंगे, यानी कार्यक्रमों का दूरदर्शन समेत निजी चैनलों पर लाइव प्रसारण किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने सोमवार को मथुरा का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों के साथ मथुरा में कोरोना संक्रमण की स्थिति और जन्माष्टमी पर्व की तैयारियों पर चर्चा की। बाद में तय हुआ कि कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक मंदिरों में सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होंगे। सूक्ष्म रूप में मंदिर से जुडे़ लोग ही पूजन-अर्चन करेंगे। मथुरा के प्रमुख मंदिर श्रीकृष्ण जन्मस्थल और द्वारिकाधीश से दूरदर्शन सहित कई न्यूज चैनलों पर लाइव टेलिकास्ट किया जाएगा।

इतिहासकार रामवीर सिंह वर्मा कहते हैं कि मार्च, 1757 में अहमदशाह अब्दाली ने मथुरा, महावन, गोकुल और वृंदावन के मंदिरों को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया था। उसने भारी लूटमार और मारकाट मचाई थी। तब भी उस वर्ष ब्रज में महापर्व जन्माष्टमी पर ऐसा ही सन्नाटा था, जैसा कि अब कोरोना के कारण है। उस वर्ष भी ब्रजवासियों ने भय के कारण चोरी-छिपे ही जन्माष्टमी पर्व मनाया था।

बृज के प्रमुख मंदिरों में यह रहेगी व्यवस्था

श्रीकृष्ण जन्म स्थान पर 12 अगस्त की रात 11 बजे से एक बजे तक जन्मोत्सव कार्यक्रम होंगे। इनके तहत रात 11 बजे से 11.55 तक गणेश जी एवं नवगृह पूजन, 11.59 तक प्राकट्य दर्शन, 12 बजे आरती, जन्माभिषेक, श्रृंगार दर्शन और रात एक बजे शयन आरती होगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि पूजन-अर्चन-दर्शन में केवल कमेटी के चुनिंदा लोग ही रहेंगे। आमजन के लिए मंदिर के गेट बंद रहेंगे।

द्वारिकाधीश मंदिर

द्वारिकाधीश मंदिर में भी बुधवार को सुबह से रात 12 बजे तक कार्यक्रम होंगे। यहां भी आमजन को कार्यक्रम में शिरकत करने की अनुमति नहीं है। प्रबंध कमेटी प्रवक्ता राजेश तिवारी ने बताया कि सुबह 6.30 बजे पंचामृत से अभिषेक, 9 बजे श्रंगार, शाम 7 बजे दर्शन, रात 10 बजे जागरण एवं रात 11.45 बजे जन्माभिषेक कार्यक्रम होगा।

बांकेबिहारी मंदिर वृंदावन

वृंदावन का श्री बांकेबिहारी मंदिर 31 सितंबर तक आमजन के लिए पहले से ही बंद है। यहां जन्माष्टमी कार्यक्रम रात्रि को मनाया जाएगा। चूंकि यहां प्रतिमा की फोटो खींचने पर रोक है। इसलिए श्रद्धालु जन्मोत्सव कार्यक्रम देखने से वंचित रहेंगे।

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