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नोएडा भूमि आवंटन घोटाला में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की याचिका पर सुरक्षित रखा फैसला

नोएडा भूमि आवंटन घोटाला में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की याचिका पर सुरक्षित रखा फैसला
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प्रयागराज। नोएडा भूमि आवंटन घोटाले के मुख्य आरोपी नोएडा अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को दोनों पक्षों की बहस के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। 10 फरवरी, 2020 को सीबीआई ने यादव सिंह को गिरफ्तार किया था। सिंह का कहना है कि सीबीआई ने निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की है, इसलिए उसे अवैध निरुद्धि से मुक्त किया जाय या जमानत पर रिहा किया जाए।

याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने की। सीबीआई के अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश और संजय यादव का कहना है कि कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के कारण अदालतें बंद थीं। आठ जून को आदेश मिला अदालतें खुलीं तो गाजियाबाद की सीबीआई अदालत भी बैठी। उसी दिन चार्जशीट दाखिल कर दी गई। कोई देरी नहीं की गई है। इसे समय से दाखिल माना जाए, जबकि याची का कहना है कि, सीबीआई ने समय से चार्जशीट दाखिल नहीं किया है। इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाए।

दरअसल, सीबीआई ने गाजियाबाद की अदालत में यादव सिंह और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने और नोएडा प्राधिकरण को 50 लाख से अधिक वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप में तीन चार्जशीट दाखिल की है। आरोप है कि, यादव सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक इंजीनियरिंग कंपनी को इलेक्ट्रिकल वर्क के करोड़ों रुपए के टेंडर अवैध तरीके से दिए थे। यादव सिंह के खिलाफ पहली बार साल 2015 में जांच शुरू हुई थी।

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