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मोदी 2.0 : साहस और सहानुभूति का वर्ष

मोदी 2.0 : साहस और सहानुभूति का वर्ष

नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष 30 मई 2020 को पूरा हो रहा है जिसने 30 मई 2019 को पदभार संभाला था। नरेन्द्र मोदी का विश्व के लोकप्रिय कद्दावर नेता के रूप में उभरना भारत की लोकतांत्रिक राजनीति की एक असाधारण उपलब्धि है। 2014 में, उनके नेतृत्व में भाजपा और राजग ने प्रचंड बहुमत दर्ज किया जिसमें भाजपा ने अकेले ही अपने दम पर बहुमत हासिल कर लिया था। 30 साल बाद जनता को इस तरह का फैसला देखने को मिला। हमारी सरकार के पहले कार्यकाल में सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन (रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म) के लिए किए गए कुछ दूरदर्शी फैसले देखने को मिले। सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामान्य नागरिकों का समावेश और उनका सशक्तिकरण करना था। चाहे वह डिजिटल इंडिया के माध्यम से प्रौद्योगिकी का उपयोग हो, जेएएमट्रिनिटी का उपयोग करके वित्तीय समावेशन का प्रयास हो, या स्वच्छ भारत अभियान के रूप में स्वच्छता और स्वास्थ्य विज्ञान में सुधार के लिए जन आंदोलन और आयुष्मान भारत जैसे कार्यक्रमों के जरिये स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में सुधार के प्रयास क्यों न हो। हमारे प्रधानमंत्री एक ऐसे नेता के रूप में उभरे जिनमें भारत के रणनीतिक और सुरक्षा हितों की रक्षा करने का साहस और दृढ़ निश्चय है और भारत को विश्व स्तर पर अद्भुत विचारों वाले देश के रूप में मान्यता दी गई। भारत की जनता ने 2019 के चुनावों में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा रखकर उनके नेतृत्व में भाजपा को भारी बहुमत से जिताया जबकि उनके विरोधियों ने उन पर झूठे आरोप लगाए और अपशब्दों का इस्तेमाल किया। पिछले लगभग साठ वर्षों में ऐसी कोई घटना देखने को नहीं मिली जब दोबारा चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर किए गए प्रदर्शन के आधार पर हुए हों।

इस नए और भारी भरकम जनादेश के साथ, भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व में एनडीए सरकार का नेतृत्व किया और अधिक साहसिक सुधारों और गरीबों के लिए उनके अनुकूल पहलों की शुरुआत की। आय के पूरक के रूप में किसानों की सभी श्रेणियों के लिए पीएम किसान योजना के अंतर्गत प्रत्येक किसान को प्रति वर्ष 6,000 रुपये प्रदान किए गए। किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और स्वरोजगार करने वालों के लिए समर्पित पेंशन योजनाएं भी शुरू की गईं ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सके।

भारत के सभी गाँवों में बिजली पहुँचाना, 8 करोड़ परिवारों को सब्सिडी वाले एलपीजी कनेक्शन प्रदान करना और समावेश के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम हमारी सरकार की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिये जेएएमट्रिनिटी- जन धन आधार मोबाइल और प्रत्यक्ष लाभ हस्तातंरण ने वास्तव में गरीबों को लाभ हस्तांतरित करने का तरीका बदल दिया है। 435 योजनाओं में 11 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेज दिए गए हैं, जिससे 1.70 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है जो बिचौलियों और फर्जी उपयोगकर्ताओं के पास चला जाता था। धारा 370 को निरस्त करने, तीन तलाक पर रोक लगाने और इसे दंडात्मक बनाने और पड़ोसी देशों में जुल्म के शिकार और शोषित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए कानून बनाने जैसी ऐतिहासिक पहलों को निश्चित रूप से पथ-प्रवर्तक कहा जा सकता है। आर्थिक मोर्चे पर भारत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए एक पसंदीदा स्थान बन गया, उल्लेखनीय ढंग से उसने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में 2014 की रैंकिंग 142 से सुधारकर 2019 में 63 पर लाकर अपनी रैंकिंग में काफी सुधार किया और वह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता के रूप में उभरा। हालांकि, सबसे चुनौतीपूर्ण क्षण कोविड-19 के रूप में सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुकरणीय साहस, सहानुभूति और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। इस महामारी का अभी तक कोई टीका नहीं है, इसलिए इसे फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन एकमात्र तरीका था। एक आश्चर्यजनक तुलना से पता चलता है कि कोविड-19 से प्रभावित पंद्रह प्रमुख देशों (चीन को छोड़कर) की जनसंख्या 142 करोड़ है और इन देशों में मरने वालों की संख्या 3.07 लाख से अधिक है जबकि भारत की जनसंख्या 137 करोड़ है और मौतों की संख्या 4,534 है। भारत में इलाज के बाद ठीक होने वालों की संख्या भी बहुत अधिक है। शुरुआती चरणों में प्रधान मंत्री ने स्वयं समाज के गरीब और कमजोर तबके के लिए 1.70 लाख करोड़रुपये के भारी मुआवजे की घोषणा की। इसमें80 करोड़ लोगों को तीन महीने के लिएमुफ्त राशन, 20 करोड़ महिला जन धन खाताधारकों को वित्तीय लाभ देना शामिल है।

बैंक से सीधे हस्तांतरण द्वारा भेजी गई कुल राशि 52,606 करोड़ रुपये के करीब है। प्रधानमंत्री ने बाद में आत्म निर्भर भारत के निर्माण के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के एक विशाल प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की। किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्रवासी श्रमिकों, शहरी गरीब और मध्यम वर्ग के घर खरीदारों के लिए 3.16 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं। अगले दो महीनों तक गरीब परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न की अगली किस्त और रेहड़ी-पटरी वालों को 10,000 रुपये तक का आसान ऋण भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए अतिरिक्त 40,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो शहरी और ग्रामीण गरीबों विशेषकर प्रवासी श्रमिकों के मुद्दों को हल करने में मदद करेगा। कृषि क्षेत्र के लिए सरकार ने फार्मगेट कृषि बुनियादी ढांचे के लिए न केवल 1.63 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की है, बल्कि प्रगतिशील सुधारों ने भी कृषि उपज की बिक्री कहीं भी और देश भर में किसी भी खरीदार को करने की अनुमति दी है जो किसान को उसकी उपज के लिए सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगी। प्रधानमंत्री ने भारतीयों की रचनात्मक और उद्यमशील क्षमताओं को कोविड-19 ने नवाचारों में एक बड़ा उछाल देखा है। प्रभावित व्यक्तियों के सावधानी बरतने और उनका पता लगाने के लिए आरोग्य सेतु जैसे प्लेटफॉर्म, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर नवीन भारतीय उत्पाद पाइपलाइन में हैं, घर से काम करने से लेकर टीवी चैनलों सहित डिजिटल शिक्षा पर असाधारण जोर जैसी सभी सुविधाएं साधारण भारतीयों को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं। आधार सक्षम भुगतान प्रणाली का उपयोग करते हुए, एटीएम या बैंक शाखा में जाने से छुटकारा दिलाने के लिए इंडिया पोस्ट ने 92.81 लाख लेनदेन के माध्यम से 1,675 करोड़ रुपये की नकद निकासी की सुविधा प्रदान की है।

हां, प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा वास्तव में बहुत पीड़ादायक है और हम सभी को इसे कम करने की पूरी कोशिश करनी होगी। मनरेगा की धनराशि के अधिक आवंटन जैसी अनेक पहलें की गई हैं, प्रवासियों के आने-जाने के लिए लगभग 3,500 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गई, उनकी स्क्रीनिंग के लिए मानवीय प्रावधान किए गए, क्वारंटाइन सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकारों को सहयोग और मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई है। कोविड-19 ने पहाड़ के अनुपात में कठिनाइयां खड़ी की हैं, पिछले कई वर्षों में शायद ही कभी ऐसा अनुभव हुआ हो। यह हमारे प्रधानमंत्री के साहसपूर्ण और निर्णायक नेतृत्व के अलावा राज्य सरकारों के एक टीम के रूप में साथ-साथ काम करने के कारण संभव हुआ है कि भारत ने दुनिया के अन्य देशों की तुलना में इस संकट को कहीं बेहतर तरीके से संभाला है। नरेंद्र मोदी सरकार ने जो साहस और सहानुभूति दिखाई है, वह निश्चित रूप से हमें इस संकट से उबारने में सक्षम करेगी। हमें यकीन है कि यह चुनौती देश के लिए एक बड़ा अवसर पैदा करेगी। भारत का समय आ गया है।

- रविशंकर प्रसाद

( लेखक केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री हैं)

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