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न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून में प्रावधान किया जाए : कुलकर्णी

भारतीय किसान संघ ने कहा नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग निर्रथक, किया जाए सुधार

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भोपाल। भारतीय किसान संघ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो तीन नए कृषि कानून बनाए गए हैं, उन कानूनों को बनाने से पहले जब अध्यादेश लाया गया था, तब संघ ने 20 हजार ग्राम समितियों के माध्यम से सुधार की मांग की गई थी, जिसे नहीं माना गया। नए कृषि कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का कोई प्रावधान नहीं है, भारतीय किसान संघ केंद्र सरकार से मांग करता है कि एमएसपी का कानूनन प्रावधान किया जाए। अगर नए कृषि कानूनों में ऐसा करना संभव नहीं है तब भी केंद्र सरकार एक नया कानून लाए, जिसमें यह प्रावधान किया जाए कि देशभर में किसी भी राज्य की प्राइवेट मंडी में अपनी उपज बेचने जाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता रहे। उक्त बातें भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कही। श्री कुलकर्णी शुक्रवार को भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र पालीवाल भी मौजूद थे।

राजनीतिक हो गया था भारत बंद

उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में भारतीय किसान संघ पूरी तरह साथ रहा है। संघ अभी भी किसानों की मांगों को मनवाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है। लेकिन कुछ राजनीतिक दल इस आंदोलन के जरिए अपना राजनीतिक हित साधने में लग गए, इसलिए किसान संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद में भारतीय किसान संघ शामिल नहीं हुआ। नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पूरी तरह निरर्थक है, कानूनों को वापस लेने की जरूरत नहीं है। नए कृषि कानूनों में संशोधन की जरूरत है, जिसके लिए किसानों और किसान संगठनों को केंद्र सरकार से सार्थक बात करनी चाहिए।

हां-ना में बात नहीं बनती

श्री कुलकर्णी ने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय किसान संघ की चारों प्रमुख मांगों को लेकर सकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं। मेरी पहली मांग एमएसपी का कानूनन प्रावधान करना है, जिसे केंद्र सरकार लिखित में देने को तैयार है। लेकिन संघ कानून बनाने की बात कर रहा है। दूसरी मांग किसानों की उपज खरीदी करने वाले व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी किया जाए, ताकि किसी विषय परिस्थिति में व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। किसान जान सकें कि खरीदी करने वाला का पता, ठिकाना क्या है। इस मांग पर भी केंद्र सहमत होता नजर आ रहा है। किसान संगठनों से केंद्र लगातार बात कर रही है, लेकिन किसान संगठन हां, ना में बात कर रहे हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। किसानों की मांगों को केंद्र सुन रही है, तो किसान संगठनों को भी केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। अपनी जिद पर अड़े नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं सर्वोच्च न्यायालय के अलग से समिति बनाने के सुझाव का स्वागत करता हूं।

गठित की जाएं कृषि न्यायालय

श्री कुलकर्णी ने कहा कि नए कानूनों में विवाद की स्थिति का निपटारा एसडीएम कोर्ट में करने का प्रावधान है, लेकिन भारतीय किसान संघ किसानों के मामलों को सुलझाने के लिए नए कृषि न्यायालय गठित करने की मांग कर रहा है। केंद्र सरकार मामलों को सिविल न्यायालय में मामलों की सुनवाई के लिए तैयार हो रही है। नए कानून में जीवन आवश्यक वस्तुओं के भण्डारण की बड़े उद्योगों और बाहर से आने वाले बड़े व्यापारियों को छूट दी गई है। ऐसे में जमाखोरी बढ़ेगी और जरूरी वस्तुओं के दामों में इजाफा होगा। भारतीय किसान संघ की मांग है कि जमाखोरी रोकने के लिए बड़े उद्योगों के लिए भी स्टॉक लिमिट तय की जाए। इसके साथ अनुबंध खेती करने वाली कंपनियों को किसानों का दर्ज न दिया जाए। अनुबंध के बाद कंपनी हर परिस्थिति में किसानों का उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य हो, ऐसे प्रावधान नए कृषि कानूनों में करने की मांग भारतीय किसान संघ कर रहा है।

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