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माणिकचंद्र वाजपेयी 'मामाजी' के नाम जारी डाक टिकट का अनावरण

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कप्तान सिंह सोलंकी व श्रीधर पराडकर ने किया लोकार्पण, मुख्यमंत्री की घोषणा मामाजी के नाम के साथ राजेंद्र माथुर के नाम से भी जारी रहेगा राष्ट्रीय परस्कार

भोपाल। ध्येयनिष्ठ पत्रकार माणिकचंद्र वाजपेयी 'मामाजी' के के जन्मशताब्दी वर्ष में उनके सम्मान व पत्रकारिता के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान और नि:स्वार्थ सामाजिक जीवन के सम्मान में डाक एवं तार विभाग भारत सरकार ने पांच रुपए का डाक टिकट जारी किया है। स्व. मामाजी के जन्मशताब्दी वर्ष में उनके पुण्य तिथि के दिन रविवार को राजधानी भोपाल के मिंटो हॉल में गरिमामय आयोजन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ओर भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने डाक टिकट का अनावरण किया। इस मौके पर मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल जीतेंद्र गुप्ता भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर ऐलान किया कि ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता के लिए स्थापित माणिकचंद्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार फिर शुरू किया गया है। वहीं कांगे्रस की कमलनाथ सरकार में माणिकचंद्र वाजपेयी के नाम स्थापित राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार को बंद कर राजेंद्र माथुर के नाम से घोषित राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार को भी मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जारी रखने का ऐलान किया है।

अहंकार शून्य व्यक्तित्व था मामाजी का व्यक्तित्व था : मुख्यमंत्री

प्रदेश के जनसंपर्क विभाग द्वारा मिंटो हॉल में आयोजित डाक टिकट अनावरण समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रख्यात पत्रकार माणिकचंद्र वाजपेयी 'मामाजी' कर्मयोगी, राष्ट्रभक्त, अहंकार शून्य, सागर-सी गहराई और आकाश-सी ऊंचाई रखने वाले व्यक्तित्व थे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मामाजी के व्यक्तित्व और कृतित्व के संबंध में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व. अटल जी भी मामाजी का बेहद सम्मान करते थे। मामाजी के स्वर्गवास के समय अटल जी बहुत द्रवित हुए थे। लाखों कार्यकर्ताओं और सैकड़ों पत्रकारों के लिए मामाजी का समर्पित जीवन प्रेरणापुंज था। मुख्यमंत्री ने गीता से आदर्श मनुष्य के गुणों को श्लोक के माध्यम से उद्धृत करते हुए कहा कि आपातकाल की संघर्ष-गाथा और अन्य ग्रंथों के माध्यम से मामाजी ने अलग पहचान बनाई। उन्होंने अनेक प्रतिभाओं को निखारा। वे सहज, सरल, समर्पित और स्वाभिमानी थे। वे एक असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे।

मामा जी ने मुझ जैसे हजारों लोगों को गढ़ा : सोलंकी

मामाजी जन्मशताब्दी वर्ष समारोह समिति के अध्यक्ष व हरियाणा व त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि मुझे भिंड के गांव से निकालकर मामाजी ने ही निखारा है। मैं आज जो कुछ भी हूं, वह मामा जी वजह से हूं। मामाजी ने मेरे जैसे हजारों लोगों को गढ़ा है। मामाजी ने पूरा जीवन समाज के लिए जिया है। मामाजी के लिए समाज ही उनका परिवार था। मामाजी ने जो कार्य समाज के लिए किया, वे आज भी प्रासंगिक हैं। मामाजी के कृतित्व व व्यक्तित्व को पुन: स्मरण करने के लिए जन्माताब्दी वर्ष मनाया गया है।

'मामाजी' के सानिध्य का परिणाम है कि मैं यहा हूं

भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में कहा कि मेरी सारी उपलब्धि मामाजी की मेहनत है। मामाजी के सानिध्य का परिणाम है कि मैं यहां हूं। लोग कहते हैं कि रेत से तेल नहीं निकलता, पानी के मंथन से घी नहीं निकलता, लेकिन मामाजी ने यह करके दिखाया है। हम लोग पत्रकारिता के क्षेत्र में गणेश शंकर विद्यार्थी और माखनलाल चतुर्वेदी के संदर्भ में जो पढ़ते थे, मामाजी ने उसे कहा नहीं बल्कि जीवन में करके लोगों को बताया है।

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